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सोलर सब्सिडी के पैसे से दूसरा काम करना पड़ेगा भारी, अब सीधे लोन खाते में पहुंचेगी रकम

 

वाराणसी। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छत पर सोलर संयंत्र लगवाने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। योजना का मकसद लोगों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के साथ बिजली के खर्च को कम करना है। हालांकि, कुछ उपभोक्ताओं ने सब्सिडी की रकम का इस्तेमाल लोन चुकाने के बजाय दूसरे कामों में करना शुरू कर दिया। अब ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

अब सोलर संयंत्र लगवाने के लिए बैंक से लिए गए लोन पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे उपभोक्ता के लोन खाते में जमा होगी। इसके लिए सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव कर दिए गए हैं। इससे उपभोक्ता सब्सिडी की रकम को किसी दूसरे खाते में लेकर उसका अन्यत्र इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।


5.75 प्रतिशत ब्याज पर मिल रहा लोन

सोलर संयंत्र लगवाने में आर्थिक परेशानी न हो, इसके लिए बैंकों की ओर से मामूली ब्याज दर पर लोन की सुविधा दी जा रही है। योजना के तहत लोन पर करीब 5.75 प्रतिशत ब्याज लिया जाता है।

उदाहरण के तौर पर तीन किलोवाट का सोलर संयंत्र लगवाने में करीब 1.80 लाख रुपये खर्च आता है। इसमें उपभोक्ता को 10 प्रतिशत यानी करीब 18 हजार रुपये डाउन पेमेंट देना होता है। इसके बाद करीब 1.62 लाख रुपये का बैंक लोन हो जाता है।

संयंत्र लगने के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से करीब 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी मिलती है। ऐसे में सब्सिडी लोन खाते में जमा होने के बाद उपभोक्ता पर करीब 54 हजार रुपये का ही लोन शेष रह जाता है।


सब्सिडी रोककर किस्त नहीं भरने की शिकायत

अधिकारियों के मुताबिक, कुछ उपभोक्ताओं ने सब्सिडी की रकम अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में ले ली और उसे लोन खाते में जमा नहीं किया। इसके साथ ही उन्होंने बैंक की किस्त भी जमा नहीं की। इससे बैंक का पैसा फंसने लगा।

योजना के तहत उपभोक्ता को सोलर संयंत्र लगने के बाद अधिकतम छह महीने बाद से लोन की किस्त चुकाने की सुविधा दी जाती है। सब्सिडी मिलने के बाद लोन की रकम काफी कम रह जाती है, इसके बावजूद कुछ उपभोक्ता किस्त जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे मामलों को बैंक और नेडा मिलकर चिह्नित कर रहे हैं। संबंधित उपभोक्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


वाराणसी में 54 हजार से अधिक संयंत्र स्थापित

प्रदेश में सोलर संयंत्र लगाने के मामले में वाराणसी भी प्रमुख जिलों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वाराणसी में 54,226 सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि इन पर करीब 36,954 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है।

वहीं, लखनऊ में 1,41,670 संयंत्र स्थापित हुए हैं और करीब 95,133 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है। कानपुर में 48,811 संयंत्र स्थापित किए गए हैं और करीब 32,061 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है।

वरिष्ठ परियोजना अधिकारी शशि गुप्ता के मुताबिक, जनहित में बैंकों की ओर से बेहद कम ब्याज पर लोन दिया जा रहा है। तीन किलोवाट का संयंत्र लगाकर उपभोक्ता हर महीने करीब ढाई से तीन हजार रुपये तक की बचत कर सकते हैं। ऐसे में कुछ सौ रुपये की किस्त भी नहीं चुकाना उचित नहीं है। सब्सिडी को लोन खाते में समायोजित करने की नई व्यवस्था से इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगेगी।