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काशी विद्यापीठ में छात्रों का हंगामा, वाइवा में कम अंक देने के विरोध में विभाग पर जड़ा ताला; एक दिन का अल्टीमेटम
 

 

वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाज कार्य संकाय चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों ने सोमवार को मौखिक परीक्षा में कम अंक दिए जाने के विरोध में विभाग पर ताला जड़कर धरना-प्रदर्शन किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मनमानी, भेदभाव और छात्रों के शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि एक दिन के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

धरने का नेतृत्व कर रहे समाज कार्य संकाय के छात्र एवं काशी विद्यापीठ छात्रसंघ महामंत्री पद के पूर्व प्रत्याशी रितिक सिंह ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इंटरनल परीक्षा में सभी छात्रों को 20 में से 20 अंक देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अधिकांश छात्रों को केवल 12 से 14 अंक ही दिए गए। उन्होंने कहा कि कई छात्रों के सिर्फ एक-दो अंक बढ़ने से उनकी ग्रेड में सुधार हो सकता था, लेकिन जानबूझकर कम अंक देकर उनके भविष्य को प्रभावित किया गया।

रितिक सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि प्रथम सेमेस्टर में कई छात्रों को अनुचित तरीके से फेल कर दिया गया, जबकि कुछ छात्रों को बिना किसी कारण अनुपस्थित दर्शा दिया गया। उन्होंने कहा कि समय पर शोध प्रबंध (डिजर्टेशन) और अन्य शैक्षणिक कार्य पूरा करने वाले छात्रों के साथ भी न्याय नहीं किया गया।

प्लेसमेंट व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय की प्लेसमेंट व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। रितिक सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में शामिल होने का दावा करता है, लेकिन वर्ष 2022 के बाद से समाज कार्य संकाय के छात्रों के लिए कोई संतोषजनक प्लेसमेंट नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि एमएसडब्ल्यू एक प्रोफेशनल कोर्स है, जिसका उद्देश्य छात्रों को समाज सेवा और विकास परियोजनाओं के लिए तैयार करना है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय करोड़ों रुपये की विभिन्न परियोजनाओं में कार्य के अवसर इलाहाबाद, लखनऊ और दिल्ली जैसे विश्वविद्यालयों के छात्रों को देता है, जबकि अपने ही संस्थान के योग्य छात्रों की अनदेखी की जाती है।

पीएचडी प्रवेश में भी भेदभाव का आरोप

छात्रों ने आरोप लगाया कि समाज कार्य संकाय के मेधावी छात्रों को बड़े प्रोजेक्ट्स और शोध कार्यों में शामिल नहीं किया जाता। साथ ही पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में भी विश्वविद्यालय के अपने छात्रों की बजाय बाहरी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाती है।

प्रदर्शन में शामिल छात्रा महिला अग्रहरि ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी करने तथा शैक्षणिक व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप लगाया।

एक दिन का दिया अल्टीमेटम

धरना दे रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक दिन का अल्टीमेटम देते हुए वाइवा और इंटरनल परीक्षा के अंकों की निष्पक्ष समीक्षा, छात्रों की शिकायतों के शीघ्र समाधान तथा प्लेसमेंट और शैक्षणिक अवसरों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। छात्रों ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।