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चंपत राय के समर्थन में उतरे स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, बोले- अंतिम सांस तक रहेगा विश्वास, राम मंदिर के विरोधियों पर साधा निशाना
 

 

वाराणसी। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में चंपत राय के योगदान की सराहना करते हुए उनका खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि चंपत राय पर उनका अखंड विश्वास पहले भी था, आज भी है और अंतिम सांस तक बना रहेगा। राम जन्मभूमि से जुड़े मुकदमे और आंदोलन के लिए दशकों तक संघर्ष करने वाले चंपत राय का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि चंपत राय ने करीब 35 वर्षों तक राम जन्मभूमि से जुड़े संघर्ष को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा इस आंदोलन को समर्पित किया। ऐसे व्यक्ति के योगदान पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

राम मंदिर निर्माण को बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राम जन्मभूमि के लिए 492 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ है। उन्होंने अपने पूज्य गुरुदेव जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर को याद करते हुए कहा कि वे अक्सर एकांत में पूछा करते थे कि क्या उनके जीवनकाल में राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण हो सकेगा। आज उनका वह सपना साकार हो चुका है।

उन्होंने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में हुए श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस ऐतिहासिक अवसर पर देश के प्रमुख संतों, विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधियों और प्रधानमंत्री की उपस्थिति में मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई थी।

राम मंदिर के लिए चंदा नहीं देने का लगाया आरोप

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं पर राम मंदिर निर्माण में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को मंदिर निर्माण के लिए चंदा नहीं देने के निर्देश दिए थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों पर भी इसी तरह के आरोप लगाए।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने पहले मंदिर निर्माण में सहयोग का विरोध किया था, वे आज इस ऐतिहासिक उपलब्धि में अपना योगदान होने का दावा किस आधार पर कर रहे हैं?

चंपत राय को बदनाम करने के प्रयासों पर जताई नाराजगी

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि चंपत राय के खिलाफ आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने के प्रयास किए गए, लेकिन इससे राम जन्मभूमि आंदोलन में उनका योगदान कम नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बादल सूर्य के प्रकाश को हमेशा के लिए नहीं ढक सकते, उसी प्रकार आरोपों और विरोध से चंपत राय के संघर्ष और समर्पण को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने दोहराया कि तमाम विवादों के बावजूद चंपत राय के प्रति उनका विश्वास अटूट है और अंतिम सांस तक बना रहेगा।