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NEET परीक्षा 21 जून को कराने पर स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती ने जताई आपत्ति, बोले- योग दिवस पर एग्जाम ठीक नहीं...

 
NEET परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के फैसले को लेकर संत समाज की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।  स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती (Swami Jitendranand Saraswati) ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेपर लीक की घटना बेहद निंदनीय है और इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द करने का फैसला सही है, क्योंकि इससे गलत तरीके से चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को रोका जा सकेगा। हालांकि, उन्होंने दोबारा परीक्षा के लिए तय की गई 21 जून की तारीख पर आपत्ति जताई।

“योग दिवस पर परीक्षा कराना उचित नहीं”

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि 21 जून पूरी दुनिया में International Day of Yoga के रूप में मनाया जाता है। ऐसे दिन लाखों विद्यार्थियों का परीक्षा केंद्रों में बैठना उचित संदेश नहीं देता।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री Narendra Modi ने योग को वैश्विक पहचान दिलाई है। संयुक्त राष्ट्र में योग दिवस को स्थापित कराने में भारत की बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में उसी दिन NEET जैसी बड़ी परीक्षा आयोजित करना ठीक नहीं है।”

“20 या 22 जून को हो सकती थी परीक्षा”

संत समाज की ओर से सुझाव दिया गया कि सरकार को परीक्षा की तारीख 20 जून या 22 जून रखने पर विचार करना चाहिए था। उनका कहना है कि इससे योग दिवस कार्यक्रमों और परीक्षा दोनों पर असर नहीं पड़ता।

छात्रों का यात्रा खर्च देने की मांग

स्वामी जितेंद्रानंद ने यह भी कहा कि NEET परीक्षा देने वाले ज्यादातर छात्र साधारण और गरीब परिवारों से आते हैं। परीक्षा रद्द होने के कारण अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

उन्होंने मांग की कि केवल फॉर्म फीस माफ करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों का यात्रा खर्च भी शिक्षा मंत्रालय को उठाना चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को परेशानी न हो।