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30 जुलाई को होगा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षांत समारोह, वैज्ञानिक प्रो. आशुतोष शर्मा होंगे मुख्य अतिथि
 

 

वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षांत समारोह 30 जुलाई को विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में आयोजित किया जाएगा। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी, जबकि आईआईटी कानपुर के चेयर प्रोफेसर एवं प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. आशुतोष शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय विशिष्ट अतिथि तथा उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि इस वर्ष का दीक्षांत समारोह भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत संस्कृति और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का महाकुंभ बनेगा। समारोह की थीम "संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" रखी गई है।

उन्होंने बताया कि समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर के मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियों के साथ स्वर्ण पदक भी प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए पात्र विद्यार्थियों की सूची तैयार की जा रही है।

देश के अग्रणी वैज्ञानिक हैं प्रो. आशुतोष शर्मा

कुलपति ने बताया कि मुख्य अतिथि प्रो. आशुतोष शर्मा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के पूर्व सचिव रह चुके हैं। उन्होंने नैनो विज्ञान, रासायनिक अभियांत्रिकी, उन्नत पदार्थ विज्ञान और विज्ञान-प्रौद्योगिकी नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्हें पद्मश्री, शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, इन्फोसिस पुरस्कार और यूनेस्को मेडल सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

दीक्षांत समारोह से पहले होंगे कई शैक्षणिक और सांस्कृतिक आयोजन

दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में भाषण, निबंध, काव्य लेखन, चित्रकला, लोकगीत-लोकनृत्य, पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएं, पुस्तक समीक्षा, बौद्धिक विमर्श, पर्यावरण एवं स्वच्छता अभियान, गोद लिए गए गांवों में जनजागरूकता कार्यक्रम, आंगनबाड़ी किट वितरण, उत्कृष्ट आंगनबाड़ी केंद्रों का सम्मान तथा मां-बेटी सम्मेलन जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पुस्तक पठन दीक्षोत्सव से हुई शुरुआत

दीक्षांत समारोह की श्रृंखला के तहत सोमवार को विश्वविद्यालय में पुस्तक पठन दीक्षोत्सव आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने एक घंटे तक पुस्तकें पढ़ीं। कार्यक्रम की संयोजक प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों में पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा अध्ययन के प्रति गंभीर, एकाग्र और चिंतनशील दृष्टिकोण विकसित करना है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि संस्कार, व्यक्तित्व निर्माण और जीवन मूल्यों की सबसे मजबूत आधारशिला हैं।