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NCERT की कक्षा 9 की किताब में शामिल होगा काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास, विध्वंस से धाम निर्माण तक पढ़ेंगे छात्र
 

 

वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सफर अब स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रहा है। एनसीईआरटी की कक्षा नौ की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास से लेकर वर्तमान काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण तक की घटनाओं को शामिल किया गया है। नई पुस्तक को अगले शैक्षणिक सत्र से पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

एनसीईआरटी की कक्षा नौ की पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond Part-2’ के एक अध्याय में काशी विश्वनाथ मंदिर के अतीत, अलग-अलग कालखंडों में हुए बदलाव और मंदिर के पुनर्निर्माण से जुड़ी जानकारियों को स्थान दिया गया है।

काशी विश्वनाथ के इतिहास के विभिन्न दौर का जिक्र

पुस्तक में काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास के साथ विभिन्न कालखंडों में मंदिर से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इसमें मुगलकाल से जुड़े प्रसंगों के साथ राजा मान सिंह, राजा टोडरमल और महारानी अहिल्याबाई होलकर के योगदान का भी जिक्र किया गया है।

इसके अलावा महाराजा रणजीत सिंह के योगदान और मंदिर के संरक्षण व पुनर्निर्माण से संबंधित विभिन्न घटनाओं को भी विद्यार्थियों के सामने रखा जाएगा। आधुनिक दौर में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और धाम के विकास तक की यात्रा को भी पाठ्य सामग्री में जगह मिलने की जानकारी है।

मथुरा-वृंदावन से नई संसद तक कई विषय शामिल

नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में केवल काशी विश्वनाथ मंदिर ही नहीं, बल्कि मथुरा-वृंदावन के मंदिरों के इतिहास, संसद भवन में स्थापित सेंगोल, भारत के नए संसद भवन और हाल के दशकों में देश में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक बदलावों से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है।

अध्याय में ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से समाज में आए बदलाव, सामाजिक दृढ़ता और अलग-अलग दौर में समाज की प्रतिक्रिया एवं प्रतिरोध जैसे विषयों को समझाने का प्रयास किया गया है।

नई पीढ़ी को काशी के इतिहास से जोड़ने की कोशिश

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को काशी विश्वनाथ मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना बताया जा रहा है। इसके माध्यम से छात्र मंदिर के इतिहास के साथ यह भी समझ सकेंगे कि अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाओं ने भारतीय समाज और संस्कृति को किस तरह प्रभावित किया।

काशी दुनिया के प्राचीनतम जीवित नगरों में गिनी जाती है और काशी विश्वनाथ मंदिर इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। अब इसके इतिहास को पाठ्यपुस्तक में शामिल किए जाने से नई पीढ़ी को काशी की विरासत और उसके ऐतिहासिक विकास के बारे में विस्तार से जानने का अवसर मिलेगा।