पुलिस पर गोली चलाना पड़ा भारी! 13 साल पुराने केस में 4 बदमाशों को 7-7 साल की सजा
वाराणसी के लहरतारा शूटआउट केस में अदालत ने पुलिस पर फायरिंग करने वाले चार दोषियों को 7-7 साल की सजा सुनाई है। अवैध हथियार रखने पर अतिरिक्त सजा भी दी गई। 2013 में एसपी पर फायरिंग की घटना में बुलेटप्रूफ जैकेट से उनकी जान बची थी।
वाराणसी: पुलिस पर जानलेवा हमला करने के चर्चित मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए चार दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है। अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने अमित सिंह उर्फ सोनू, धीरज पाल, सन्नी सोनकर और विशाल को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक अभियुक्त को तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अवैध हथियार रखने पर भी अलग से सजा
इस मामले में अदालत ने अवैध असलहा बरामद होने के आरोप को भी गंभीर मानते हुए चारों अभियुक्तों को दो-दो वर्ष के अतिरिक्त कारावास और तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी ओंकार नाथ तिवारी और विनय कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर अदालत ने यह कड़ा फैसला सुनाया।
2013 में लहरतारा ओवरब्रिज पर हुई थी मुठभेड़
यह मामला 12 नवंबर 2013 का है, जब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (अपराध) कमलेश दीक्षित अपनी टीम के साथ लहरतारा ओवरब्रिज पर चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान सूचना मिली कि लूट और चोरी की घटनाओं में शामिल बदमाश तीन बाइकों पर मंडुवाडीह की ओर से आ रहे हैं। पुलिस ने जब संदिग्धों को रोकने की कोशिश की, तो बदमाशों ने घेराबंदी देखकर बाइक छोड़ दी और भागते हुए पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई एसपी की जान
फायरिंग के दौरान एक गोली पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित की बुलेटप्रूफ जैकेट के बाईं ओर लगी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई। इसके बाद पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पीछा कर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से अवैध हथियार व कारतूस बरामद किए।
दो अभियुक्तों ने कबूला जुर्म, बाकी चार को मिली सजा
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार मुख्य अभियुक्तों के साथ अरुण उर्फ नखड़ू और अजय यादव के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अरुण उर्फ नखड़ू और अजय यादव ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उनकी पत्रावली अलग कर दी गई। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने चारों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
कोर्ट का सख्त संदेश: पुलिस पर हमला बर्दाश्त नहीं
अदालत के इस फैसले को पुलिस पर हमले जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह निर्णय साफ करता है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।