ठंडाई-मलइयो से बनारसी पान तक... काशी के ये 6 पारंपरिक व्यंजन बनेंगे ग्लोबल ब्रांड
Updated: Jun 8, 2026, 18:46 IST
वाराणसी। बनारसी पान की खुशबू, मलइयो की मिठास, कचौड़ी का बेजोड़ स्वाद और ठंडाई की ताजगी अब केवल काशी तक सीमित नहीं रहेगी। उत्तर प्रदेश सरकार की "एक जनपद एक व्यंजन" (ODOC) योजना के तहत वाराणसी के पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए योगी सरकार उद्यमियों और कारीगरों को आर्थिक सहायता, ब्रांडिंग और विपणन सहयोग उपलब्ध कराएगी।
इन छह व्यंजनों का हुआ चयन
योजना के तहत वाराणसी के छह प्रमुख पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया गया है। इनमें-
मलइयो
बनारसी पान
कचौड़ी
तिरंगा बर्फी
लौंगलता
ठंडाई
शामिल हैं। इन व्यंजनों को नई पहचान देने के साथ इनके व्यवसाय को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
25 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी
उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी के अनुसार, योजना के तहत व्यंजन व्यवसाय से जुड़े लोगों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए मशीनरी, पैकेजिंग, लेबलिंग, कोल्ड चेन, फूड टेस्टिंग लैब और क्लाउड किचन जैसी सुविधाओं की स्थापना हेतु ऋण के सापेक्ष 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सहायता और सब्सिडी दी जाएगी।
ब्रांडिंग और मार्केटिंग में मिलेगा सहयोग
योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विपणन प्रोत्साहन है। अक्सर स्थानीय हलवाई और कारीगर संसाधनों की कमी के कारण बड़े फूड फेस्टिवल या अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हिस्सा नहीं ले पाते। सरकार ऐसे उद्यमियों को ब्रांडिंग, प्रचार-प्रसार और विभिन्न मंचों तक पहुंचाने में मदद करेगी, जिससे काशी के पारंपरिक स्वाद को वैश्विक पहचान मिल सके।
कौन कर सकता है आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और वह संबंधित जनपद का स्थायी निवासी हो। साथ ही परिवार के किसी सदस्य ने पहले किसी अन्य स्वरोजगार योजना का लाभ न लिया हो। आवेदन के साथ 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी शपथ पत्र भी जमा करना होगा।
स्थानीय स्वाद को मिलेगा नया बाजार
सरकार की इस पहल से काशी के पारंपरिक व्यंजनों को नया बाजार मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल स्थानीय व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और बनारस की खानपान संस्कृति वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकेगी।
इन छह व्यंजनों का हुआ चयन
योजना के तहत वाराणसी के छह प्रमुख पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया गया है। इनमें-
मलइयो
बनारसी पान
कचौड़ी
तिरंगा बर्फी
लौंगलता
ठंडाई
शामिल हैं। इन व्यंजनों को नई पहचान देने के साथ इनके व्यवसाय को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
25 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी
उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी के अनुसार, योजना के तहत व्यंजन व्यवसाय से जुड़े लोगों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए मशीनरी, पैकेजिंग, लेबलिंग, कोल्ड चेन, फूड टेस्टिंग लैब और क्लाउड किचन जैसी सुविधाओं की स्थापना हेतु ऋण के सापेक्ष 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सहायता और सब्सिडी दी जाएगी।
ब्रांडिंग और मार्केटिंग में मिलेगा सहयोग
योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विपणन प्रोत्साहन है। अक्सर स्थानीय हलवाई और कारीगर संसाधनों की कमी के कारण बड़े फूड फेस्टिवल या अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हिस्सा नहीं ले पाते। सरकार ऐसे उद्यमियों को ब्रांडिंग, प्रचार-प्रसार और विभिन्न मंचों तक पहुंचाने में मदद करेगी, जिससे काशी के पारंपरिक स्वाद को वैश्विक पहचान मिल सके।
कौन कर सकता है आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और वह संबंधित जनपद का स्थायी निवासी हो। साथ ही परिवार के किसी सदस्य ने पहले किसी अन्य स्वरोजगार योजना का लाभ न लिया हो। आवेदन के साथ 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी शपथ पत्र भी जमा करना होगा।
स्थानीय स्वाद को मिलेगा नया बाजार
सरकार की इस पहल से काशी के पारंपरिक व्यंजनों को नया बाजार मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल स्थानीय व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और बनारस की खानपान संस्कृति वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकेगी।