वाराणसी में तेजी से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर, घाटों का आपसी संपर्क टूटा, नाव संचालन बंद
वाराणसी में सोमवार सुबह से लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। आसमान में बादल छाए हैं और बारिश के बीच तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक मानसून के सक्रिय रहने का अनुमान जताया है। बारिश के साथ गंगा के जलस्तर में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, सोमवार सुबह 8 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 65.80 मीटर दर्ज किया गया। नदी करीब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। फिलहाल जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 4.46 मीटर नीचे है, लेकिन जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उससे अगले 48 घंटे वाराणसी के लिए अहम माने जा रहे हैं।
शनिवार से तेजी से बढ़ रहा गंगा का पानी
गंगा के जलस्तर में शनिवार से तेजी आई। रविवार को पानी बढ़ने की रफ्तार करीब 7 सेंटीमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। करीब 12 घंटे में लगभग तीन फीट पानी बढ़ने से काशी के घाटों की तस्वीर तेजी से बदल गई। देर रात गंगा का पानी शीतला घाट के आसपास तक पहुंच गया।
प्रयागराज और मिर्जापुर में भी गंगा का जलस्तर करीब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुमान के मुताबिक, इन इलाकों में बढ़ रहे पानी का असर अगले 48 घंटे तक वाराणसी में भी दिखाई दे सकता है।
घाटों का संपर्क टूटा, नाव संचालन बंद
गंगा का पानी बढ़ने से काशी के लगभग सभी प्रमुख घाटों के निचले हिस्से जलमग्न हो गए हैं। एक घाट से दूसरे घाट के बीच संपर्क भी प्रभावित हुआ है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने नाव संचालन पूरी तरह बंद कर दिया है।
घाटों पर पुलिस, जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। सावन सोमवार के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। लोगों से गहरे पानी में नहीं जाने की अपील की जा रही है।
वरुणा और असि नदी के किनारे भी निगरानी बढ़ा दी गई है। निचले इलाकों में प्रशासन की टीमें पहुंचकर लोगों को सतर्क कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
मणिकर्णिका पर आठ चितास्थल डूबे
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर भी दिखाई दे रहा है। यहां आठ चितास्थल पानी में डूब चुके हैं। रविवार शाम महाश्मशान नाथ मंदिर के पास केवल छह-सात चिताएं ही लग सकीं। नीचे शवदाह के लिए जगह कम पड़ने के बाद छत पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी पड़ी।
विष्णुपद क्षेत्र में भी पानी कुछ ही सीढ़ियों की दूरी पर रह गया है। घाट के निचले हिस्से में पानी भरने से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
हरिश्चंद्र घाट पर भी बदली व्यवस्था
हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह के लिए बने प्लेटफॉर्म भी पानी में डूब गए हैं। अब सीढ़ियों पर अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। सामान्य दिनों में यहां एक साथ 10 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार हो जाता था, लेकिन जलस्तर बढ़ने के बाद अब तीन से चार शवों का ही अंतिम संस्कार हो पा रहा है।
अगर गंगा इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो आने वाले समय में घाट के ऊपर की गलियों में अंतिम संस्कार कराने की नौबत आ सकती है।
दुकानदारों और नाविकों की बढ़ी परेशानी
गंगा के बढ़ते पानी ने घाट किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों, नाविकों और तीर्थपुरोहितों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। कई दुकानों और पूजा सामग्री की गुमटियों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया जा चुका है। नाव संचालन बंद होने से नाविकों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा है।
उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की बारिश का असर
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के मुताबिक, पिछले 48 घंटे में गंगा के जलस्तर में तेज बढ़ोतरी हुई है। उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंगा और यमुना के जलस्तर में वृद्धि हुई है, जिसका असर वाराणसी में भी दिखाई दे रहा है।
स्थिति को देखते हुए पुलिस, राजस्व विभाग और एनडीआरएफ को अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ से निपटने के लिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक टीमें गठित की गई हैं। जरूरत पड़ने पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी रखी गई है।