चौकाघाट में एलिवेटेड रोड का रैंप उतारने का विरोध, लकड़ी व्यापारियों ने दिया धरना, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
वाराणसी। वरुणा एलिवेटेड रोड का रैंप चौकाघाट स्थित लकड़ी मंडी के पास उतारने के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को लकड़ी व्यापार मंडल और प्राचीन बनारस बचाओ संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में धरना आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित रैंप से शहर में यातायात जाम बढ़ने, व्यापार प्रभावित होने और बड़ी संख्या में मकानों के ध्वस्तीकरण की आशंका जताई।
रैंप बनने से कई इलाकों में जाम लगने की आशंका
धरने में शामिल व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि चौकाघाट लकड़ी मंडी के पास संस्कृत विश्वविद्यालय मार्ग पर वरुणा एलिवेटेड रोड का रैंप उतारने की योजना है। यदि यह रैंप यहां बनाया जाता है, तो बड़ी संख्या में वाहन जगतगंज के आसपास उतरेंगे। इससे तेलियाबाग, लहुराबीर, कबीरचौरा, मैदागिन, गोदौलिया और नई सड़क सहित शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि इस परियोजना के कारण राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, डॉ. सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्रों तथा सैकड़ों मकानों के प्रभावित होने की आशंका है। उनका कहना है कि इससे हजारों लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है और चौकाघाट की ऐतिहासिक लकड़ी मंडी का अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।
चौकाघाट की जगह नमो घाट के पास रैंप बनाने की मांग
धरने के बाद आयोजित बैठक में व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से प्रस्तावित रैंप के स्थान पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि रैंप को चौकाघाट में उतारने के बजाय नमो घाट के पास भारत सेवाश्रम संघ के आसपास बनाया जाए।
इस दौरान लकड़ी व्यापार मंडल के महामंत्री राजेंद्र गांधी कुशवाहा ने कहा कि वरुणा एलिवेटेड रोड का रैंप चौकाघाट में नहीं उतारा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चौकाघाट से नमो घाट तक जीटी रोड पर प्रस्तावित ऊपरगामी मार्ग का भी विरोध किया। उनका कहना था कि सिटी स्टेशन और कज्जाकपुरा ओवरब्रिज के कारण इस मार्ग के निर्माण में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई शिकायत
धरने में शामिल लोगों ने बताया कि इस मामले को लेकर क्षेत्रीय जनता पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल के शहर उत्तरी स्थित कार्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंप चुकी है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजकर प्रस्तावित निर्माण से जुड़ी आशंकाओं और समस्याओं से अवगत कराया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले स्थानीय व्यापारियों, निवासियों और संबंधित पक्षों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि यातायात व्यवस्था और स्थानीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
धरने में बड़ी संख्या में व्यापारी और स्थानीय लोग रहे मौजूद
धरने की अध्यक्षता लकड़ी व्यापार मंडल वाराणसी के अध्यक्ष शंभू दत्त वेलवाल ने की, जबकि संचालन महामंत्री राजेंद्र गांधी कुशवाहा ने किया।
इस दौरान उमाशंकर चौहान, लल्लन चौहान, धर्मेश महाराज, अजीत चौहान, गणेश चौहान, अशोक चौहान, हरी चौहान, रामाश्रय पाल, कन्हैया चौहान, सुनील सिंह चौहान, सुदर्शन चौहान, उमेश चौहान, बबलू बाबा और सूबेदार चौहान सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
फिलहाल व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से परियोजना के प्रस्तावित स्वरूप में बदलाव करने और चौकाघाट की लकड़ी मंडी एवं आसपास के आवासीय क्षेत्रों को प्रभावित होने से बचाने की मांग की है।