UGC नए नियमों पर वाराणसी में उबाल! BHU-MGKVP में उग्र छात्र आंदोलन
वाराणसी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026' के खिलाफ बुधवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया। सुबह से ही आठ संकायों में छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। छात्रों ने कक्षाओं पर ताले लगाए और जुलूस निकालते हुए 'यूजीसी रोल-बैक' के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर जोरदार नारेबाजी की और नए नियमों को वापस लेने की मांग की।
इस बीच, राष्ट्रीय हिंदू दल संगठन ने भी इन नियमों का कड़ा विरोध जताया। संगठन के अध्यक्ष रोशन पांडेय ने प्रधानमंत्री को अपने खून से लिखा पत्र भेजा है। उन्होंने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर इस्तीफा देने की बात कही। रोशन पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा सवर्णों को मिटाने और उनका गला घोंटने के लिए ये नियम लाई है। उन्होंने इसे ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूतों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' करार दिया।
बीएचयू कैंपस से कचहरी तक फैला विरोध
मंगलवार को ही बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) कैंपस से लेकर कचहरी तक छात्रों और विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नए नियमों को सवर्णों के हितों के खिलाफ बताया और इसे रद्द करने की मांग की। कचहरी पर पुलिस से नोकझोंक भी हुई। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी और सरकार ने सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज होगा।
जिला मुख्यालय पर सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन कर नियमों को भेदभावपूर्ण बताया। उनका कहना था कि नए प्रावधानों से सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज होने का खतरा बढ़ जाएगा। यदि केंद्र सरकार और यूजीसी ने इन प्रावधानों को वापस नहीं लिया या संशोधन नहीं किया तो दिल्ली में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
बीएचयू में छात्रों ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण कार्यालय पर धरना दिया और नियमों को 'काला कानून' करार देते हुए वापस लेने की मांग की। हिमांशु राय और आशुतोष शुक्ला ने चेतावनी दी कि यदि नियम वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।
कचहरी पर केसरिया भारत संस्था से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शन किया, जहां पुलिस से नोकझोंक हुई। भाजपा किसान मोर्चा के जिला मंत्री एडवोकेट प्रिंस चौबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि नए नियमों से आमजन, छात्र और शिक्षक वर्ग में भय का माहौल है।
ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए हैं, लेकिन सवर्ण समुदाय इसे एकतरफा और दुरुपयोग का खतरा मान रहा है। विरोध देशव्यापी हो रहा है, जिसमें दिल्ली में भी सवर्ण सेना जैसे संगठन सक्रिय हैं।