निजी स्कूलों की सरकार से मांग: RTE फी रिम्बर्समेंट और टैक्स माफी को लेकर सौंपा ज्ञापन
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन उत्तर प्रदेश से जुड़े निजी विद्यालयों ने आरटीई शुल्क प्रतिपूर्ति में देरी, टैक्स माफी और अभिभावकों को मिलने वाली 5000 रुपये की सहयोग राशि जारी करने की मांग उठाई है। स्कूलों का कहना है कि भुगतान न मिलने से आर्थिक संकट गहरा रहा है और सरकार से जल्द समाधान की अपील की गई है।
वाराणसी: प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन उत्तर प्रदेश से जुड़े निजी विद्यालयों ने अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से समाधान की मांग की है। एसोसिएशन से जुड़े स्कूलों का कहना है कि आरटीई (Right to Education) शुल्क प्रतिपूर्ति में देरी और टैक्स से जुड़ी समस्याओं के कारण कई निजी विद्यालय आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। निजी विद्यालयों ने सरकार से इन मुद्दों पर जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
RTE शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
एसोसिएशन के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 की आरटीई शुल्क प्रतिपूर्ति अभी तक कई विद्यालयों को पूरी तरह प्राप्त नहीं हुई है। कुछ स्कूलों को निर्धारित छात्र संख्या से कम राशि मिली है, जबकि कई विद्यालयों को अब तक कोई भुगतान ही नहीं मिला है।
इसके अलावा कई स्कूलों को पिछले सत्रों की आरटीई प्रतिपूर्ति भी बकाया बताई जा रही है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इससे उनके सामने आर्थिक अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई है और संस्थानों को संचालन में कठिनाई हो रही है।
हाउस टैक्स की तरह अन्य टैक्स माफ करने की मांग
निजी विद्यालयों ने नगर निगम और शहरी सीमा में आने वाले स्कूलों के लिए कुड़ा टैक्स, सीवर टैक्स और वाटर टैक्स माफ करने की मांग भी उठाई है।
एसोसिएशन का कहना है कि जिस तरह हाउस टैक्स में छूट दी जाती है, उसी तरह इन टैक्सों को भी माफ किया जाना चाहिए क्योंकि निजी विद्यालय समाज सेवा का कार्य करते हैं और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
अभिभावकों को मिलने वाली सहयोग राशि भी नहीं मिली
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने यह भी बताया कि सत्र 2025-26 के लिए अभिभावकों को दी जाने वाली 5000 रुपये की सहयोग राशि अभी तक उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। इसके कारण अभिभावकों के सामने भी आर्थिक परेशानी की स्थिति पैदा हो रही है।
सरकार से समाधान की मांग
एसोसिएशन से जुड़े निजी विद्यालयों ने सरकार से अनुरोध किया है कि आरटीई शुल्क प्रतिपूर्ति, टैक्स माफी और अभिभावक सहयोग राशि से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान किया जाए। निजी विद्यालयों का कहना है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो कई स्कूलों के लिए शैक्षणिक और आर्थिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाना मुश्किल हो सकता है।