23 साल बाद मिला इंसाफ, वाराणसी में बुजुर्ग दंपती की हत्या के तीन दोषियों को उम्रकैद
वाराणसी: सारनाथ थाना क्षेत्र की श्रीनगर कॉलोनी, पहड़िया में 23 साल पहले हुए डकैती और बुजुर्ग दंपती की हत्या के मामले में अदालत ने शुक्रवार को तीन आरोपियों को दोषी करार दिया। विशेष न्यायाधीश द्वितीय (पॉक्सो एक्ट) रचना सिंह की अदालत ने राजू सिंह, विकास झा और संजय कहार को उम्रकैद की सजा सुनाई। तीनों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। फैसला आने के बाद दोषियों को जेल भेज दिया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से मुकदमे की पैरवी एडीजीसी श्रवण कुमार रावत ने की। अदालत में अभियोजन ने आठ गवाह पेश किए थे।
भोर में छत के रास्ते घर में घुसे थे बदमाश
अभियोजन के अनुसार, प्रेमनाथ कपूर सारनाथ थाना क्षेत्र की श्रीनगर कॉलोनी, पहड़िया में अपने परिवार के साथ अर्धनिर्मित नए मकान में रहते थे। 29 नवंबर 2003 की भोर करीब तीन से चार बजे के बीच कुछ बदमाश डकैती डालने की नीयत से छत के रास्ते घर में दाखिल हुए।
बदमाश सबसे पहले प्रेमनाथ कपूर के नाती यती टंडन के कमरे में पहुंचे। उस समय यती पढ़ाई कर रहा था। उसने बदमाशों को रोकने की कोशिश की तो आरोप है कि उन्होंने उसके साथ मारपीट की।
इसके बाद बदमाश दूसरे कमरे में पहुंचे, जहां प्रेमनाथ कपूर और उनकी पत्नी कमला कपूर सो रहे थे। आरोपियों ने दोनों पर धारदार हथियार और डंडों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।
माता-पिता को बचाने आए बेटे-बहू पर भी हमला
यती की चीख-पुकार सुनकर प्रेमनाथ कपूर का बेटा संजय कपूर और बहू अनीता अपने कमरे से बाहर आए। उन्होंने माता-पिता को बचाने का प्रयास किया तो बदमाशों ने उन पर भी हमला कर दिया।
अभियोजन के मुताबिक, बदमाशों ने प्रेमनाथ कपूर की पोती के साथ भी मारपीट की। इसके बाद आरोपी घर में रखे जेवरात, 35 हजार रुपये नकद, कपड़े और कैमरा लेकर मौके से फरार हो गए।
यती और प्रेमनाथ कपूर की दूसरी बहू सपना कपूर के शोर मचाने पर कॉलोनी के लोगों ने बदमाशों का पीछा किया, लेकिन वे उस समय पकड़ में नहीं आ सके।
इलाज के दौरान बुजुर्ग दंपती की मौत
हमले में घायल प्रेमनाथ कपूर, उनकी पत्नी कमला कपूर और अनीता को सुबह करीब सात बजे बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया। सपना कपूर ने परिवार के अन्य घायलों का पास के अस्पताल में इलाज कराया।
हालांकि, इलाज के दौरान उसी दिन प्रेमनाथ कपूर और उनकी पत्नी कमला कपूर की मौत हो गई।
घटना के बाद सपना कपूर ने सारनाथ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने हत्या, डकैती और अन्य संबंधित धाराओं में जांच शुरू की।
पुलिस ने चार आरोपियों को किया था गिरफ्तार
विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें बिहार के सीतामढ़ी जिले के मेजरगंज थाना क्षेत्र के मोहनी मंडल गांव निवासी विकास झा, मिर्जापुर के लालगंज थाना क्षेत्र के दिधुली गांव निवासी राजू सिंह और बिहार के रोहतास जिले के शिवसागर थाना क्षेत्र के रायपुर चोर गांव निवासी संजय कहार शामिल थे।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर डकैती में गया सामान भी बरामद करने का दावा किया था।
मुकदमे में चौथे आरोपी छोटू कुमार की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई। उसके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।
प्रत्यक्षदर्शी ने अदालत में की आरोपियों की पहचान
मामले में संजय कपूर को प्रत्यक्षदर्शी के रूप में पेश किया गया। अभियोजन के मुताबिक, उन्होंने अदालत में चारों आरोपियों की पहचान की और घटना में उनकी भूमिका के संबंध में बयान दर्ज कराया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाह पेश किए। गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने राजू सिंह, विकास झा और संजय कहार को दोषी करार दिया।
तीनों दोषियों को उम्रकैद, 15-15 हजार रुपये जुर्माना
अदालत ने शुक्रवार को मामले में फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों दोषियों को जेल भेज दिया गया। इस तरह वर्ष 2003 में हुई इस वारदात के करीब 23 साल बाद मामले में अदालत का फैसला आया।