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वाराणसी में 500 बेड के महिला हॉस्टल को मिली रफ्तार, जिम, कैंटीन और शिशु गृह की होगी सुविधा

वाराणसी के रामनगर में 500 बेड का आधुनिक कामकाजी महिला छात्रावास जल्द बनने जा रहा है। 47.75 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस हॉस्टल में जिम, शिशु गृह, कैंटीन, ऑडिटोरियम समेत कई सुविधाएं होंगी। सरकारी हॉस्टल बनने से नौकरीपेशा महिलाओं को सुरक्षा और कम खर्च में आवास मिलेगा।

 

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ी राहत की तैयारी शुरू हो गई है। रामनगर के साहित्यनाका क्षेत्र में 500 बेड क्षमता वाले आधुनिक महिला छात्रावास के निर्माण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के महज कुछ दिनों के भीतर जमीन हस्तांतरण से लेकर कार्यदायी संस्था के चयन और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। परियोजना पूरी होने के बाद नौकरीपेशा महिलाओं को सुरक्षित और कम खर्च में आवास उपलब्ध होगा।

21 जुलाई को मिली मंजूरी, अब तेजी से आगे बढ़ रही प्रक्रिया

मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास योजना और त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत 21 जुलाई को इस परियोजना को हरी झंडी मिली थी। इसके बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए रामनगर के साहित्यनाका स्थित करीब 6,000 वर्ग मीटर भूमि राजस्व विभाग से प्रोबेशन विभाग को हस्तांतरित कर दी है।

निर्माण कार्य के लिए राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। वहीं, डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। डीपीआर मंजूर होने के बाद फाइल वित्त विभाग भेजी जाएगी और बजट जारी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

47.75 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक छात्रावास

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 47.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत कुल 334.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि शुरुआती चरण के लिए 170 करोड़ रुपये का बजट पहले ही स्वीकृत किया जा चुका है। व्यय वित्त समिति भी इस परियोजना को मंजूरी दे चुकी है।

पहले 8 मंजिल, बाद में 13 मंजिल तक होगा विस्तार

महिला छात्रावास का निर्माण शुरुआती चरण में आठ मंजिल तक किया जाएगा। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 13 मंजिल तक विस्तारित करने की भी योजना है। कुल 6,000 वर्ग मीटर भूमि में से करीब 2,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में भवन का निर्माण होगा। निर्माण एजेंसी को परियोजना 18 महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है।

जिम, कैंटीन, शिशु गृह और ऑडिटोरियम जैसी आधुनिक सुविधाएं

यह छात्रावास केवल रहने की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। परिसर में महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें शिशु गृह (क्रेच), जिम सेंटर, ऑडिटोरियम, कैंटीन, मिनी पार्क, मंदिर, मनोरंजन की सुविधाएं, सुरक्षित आवासीय परिसर शामिल हैं।

इसके अलावा, छात्रावास से शहर के प्रमुख इलाकों तक बस सेवा शुरू करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे नौकरीपेशा महिलाओं को आने-जाने में आसानी होगी।

महंगे पीजी से मिलेगी राहत

वर्तमान में वाराणसी शहर में लगभग 300 निजी महिला पीजी और छात्रावास संचालित हैं, जहां कामकाजी महिलाओं को हर महीने 8 हजार से 12 हजार रुपये तक किराया देना पड़ता है। सरकारी छात्रावास शुरू होने के बाद महिलाओं को सुरक्षित वातावरण के साथ कम खर्च में आवास उपलब्ध होगा, जिससे उनकी आर्थिक बचत भी होगी।

जमीन की नापी पूरी, निर्माण की तैयारी तेज

महिला कल्याण विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने हाल ही में डबल पानी टंकी के पास प्रस्तावित भूमि की नापी पूरी कर ली है। अधिकारियों के अनुसार अब प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और बजट जारी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

महिलाओं ने बताया दूरदर्शी फैसला

परियोजना को लेकर स्थानीय महिलाओं और शिक्षाविदों ने सरकार की पहल का स्वागत किया है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेशमा मिर्जा ने कहा कि महिला छात्रावास बनने से सबसे बड़ी राहत सुरक्षा के स्तर पर मिलेगी और महिलाओं को एक ही परिसर में सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

रामनगर निवासी अंजलि कुमारी का कहना है कि सरकार की यह योजना महिलाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है और यह दूरदर्शी सोच का प्रमाण है। मनसा गुप्ता ने कहा कि कम वेतन पर काम करने वाली महिलाओं के लिए निजी पीजी का खर्च उठाना मुश्किल होता है। सरकारी छात्रावास बनने से उन्हें बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। सहायक अध्यापिका जया कुमारी ने इसे नौकरीपेशा महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि सुरक्षित आवास के साथ सभी आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी।

अधिकारी बोले- बजट मिलते ही शुरू होगा निर्माण

जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज कुमार मिश्र ने बताया कि साहित्यनाका स्थित भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने की ओर है और डीपीआर अंतिम चरण में है। वित्त विभाग से बजट जारी होते ही राजकीय निर्माण निगम निर्माण कार्य शुरू करेगा। परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग विभागीय स्तर पर की जाएगी।