{"vars":{"id": "130921:5012"}}

वाराणसी सेंट्रल जेल में लगा हाईटेक बैग स्कैनर, मोबाइल से लेकर चाकू-औजार तक बताएगा संदिग्ध सामान

वाराणसी केंद्रीय कारागार समेत यूपी की आठ जेलों में मुलाकातियों के बैग अब हाईटेक स्कैनर से जांचे जाएंगे। वाराणसी जेल में ट्रायल के दौरान सामान के बीच छिपाकर लाया जा रहा प्रतिबंधित नेल कटर पकड़ा गया। सरकार ने इस सुरक्षा व्यवस्था पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

 

वाराणसी: जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सेवाएं अब मुलाकातियों के सामान की हाईटेक जांच करने जा रहा है। केंद्रीय कारागार वाराणसी समेत प्रदेश की आठ जेलों में मुलाकातियों के बैग बैग स्कैनर से जांचे जाएंगे। इस व्यवस्था का ट्रायल वाराणसी केंद्रीय कारागार में शुरू हो चुका है, जहां पहले ही दिन सामान के बीच छिपाकर जेल के अंदर ले जाए जा रहे प्रतिबंधित नेल कटर को स्कैनर ने पकड़ लिया।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की इस योजना पर सरकार करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर रही है। सबकुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो इसी सप्ताह इन स्कैनरों का नियमित संचालन शुरू हो जाएगा।

वाराणसी जेल में ट्रायल के दौरान पकड़ में आया नेल कटर

केंद्रीय कारागार वाराणसी में बैग स्कैनर इंस्टॉल कर दिया गया है। ट्रायल के पहले दिन एक मुलाकाती ने सामान के बीच छिपाकर नेल कटर अंदर ले जाने की कोशिश की।

स्कैनर से बैग गुजारा गया तो मशीन ने संदिग्ध वस्तु की पहचान कर अलार्म बजा दिया। जांच में प्रतिबंधित नेल कटर बरामद हुआ। इस तरह तकनीकी जांच के जरिए जेल के अंदर संदिग्ध सामान पहुंचाने की कोशिश को शुरुआती चरण में ही रोक दिया गया।

इन आठ जेलों में लागू होगी नई व्यवस्था

पहले चरण में केंद्रीय कारागार वाराणसी के साथ नैनी (प्रयागराज), मथुरा और अयोध्या की जेलों तथा मेरठ, आगरा और मुरादाबाद के जिला कारागारों में बैग स्कैनर लगाने की व्यवस्था की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कुल आठ जेलों में यह सुरक्षा व्यवस्था लागू की जानी है।

इसका उद्देश्य मुलाकातियों के सामान की जांच को अधिक प्रभावी बनाना और मैनुअल चेकिंग के दौरान छूट जाने वाली संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करना है।

बंदी रक्षक संभालेंगे स्कैनर की जिम्मेदारी

बैग स्कैनर के संचालन की जिम्मेदारी बंदी रक्षकों को दी जाएगी। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों को मशीन के संचालन और स्क्रीन पर संदिग्ध वस्तुओं की पहचान की प्रक्रिया से परिचित कराया जाएगा।

यदि स्कैनर में तकनीकी खराबी आती है तो मशीन की आपूर्ति करने वाली टीम को 48 घंटे के भीतर उसे ठीक करना होगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी बाधा आने पर उसे जल्द दूर करने की व्यवस्था भी की गई है।

मैनुअल चेकिंग भी रहेगी जारी

जेल प्रशासन के मुताबिक बैग स्कैनर लगने के बाद भी मुलाकातियों की मैनुअल चेकिंग बंद नहीं होगी। दोनों व्यवस्थाएं समानांतर रूप से जारी रहेंगी।

केंद्रीय कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डा. राधा कृष्ण मिश्र के अनुसार, जेल की सुरक्षा के लिए पहले से ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा दो कंट्रोल रूम की व्यवस्था भी है। ऐसे में बैग स्कैनर सुरक्षा तंत्र में एक और महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेगा।

किन सामानों पर अलर्ट कर सकता है स्कैनर?

बैग स्कैनर अलग-अलग तरह की वस्तुओं और पदार्थों को पहचानकर संदिग्धता का संकेत दे सकता है। इनमें प्रमुख रूप से-

  • धातु की वस्तुएं: चाकू, कैंची, बंदूक, कारतूस और औजार।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, कैमरा, चार्जर और पावर बैंक।
  • जैविक पदार्थ: कपड़े, कागज, प्लास्टिक, लकड़ी और खाद्य सामग्री समेत कुछ अन्य पदार्थ।
  • अजैविक वस्तुएं: कांच, सिरेमिक और पत्थर।
  • तरल पदार्थ: बोतल में रखा पानी, तेल और कुछ रासायनिक पदार्थ।
  • अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री: बैटरियां, तारों के गुच्छे और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे।

स्कैनर संदिग्ध वस्तुओं के बारे में संकेत देने के साथ उनकी संदिग्धता की प्रतिशतता भी प्रदर्शित करता है, जिससे सुरक्षा कर्मियों को आगे की जांच में मदद मिलती है।

संदिग्ध सामान पहुंचाने की कोशिशों पर लगेगी रोक

जेल प्रशासन का मानना है कि हाईटेक स्कैनिंग व्यवस्था से मुलाकातियों के सामान में छिपाकर प्रतिबंधित वस्तुएं अंदर ले जाने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगेगी। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी जांच के साथ पारंपरिक तलाशी प्रक्रिया भी जारी रहेगी।