{"vars":{"id": "130921:5012"}}

वाराणसी में युवक को घर से उठाने के आरोप पर कोर्ट का आदेश, पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज होगा केस

वाराणसी के चोलापुर में युवक को रात में घर से उठाने और झूठे मुकदमे में फंसाने के आरोप पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट ने पुलिस आख्या से असहमति जताते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने और स्वतंत्र राजपत्रित अधिकारी से निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
 

वाराणसी: चोलापुर थाना क्षेत्र में एक युवक को रात में घर से उठाकर कई दिनों तक थाने में रखने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और झूठे मुकदमे में फंसाने के प्रयास के आरोपों पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) सुधाकर राय ने चोलापुर पुलिस की ओर से पेश की गई आख्या से असहमति जताते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश

यह आदेश चोलापुर थाना क्षेत्र की निवासी सुशीला देवी की ओर से उपनिरीक्षक संध्या जायसवाल और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ दाखिल वाद की सुनवाई के दौरान दिया गया।

अदालत ने चोलापुर थाना प्रभारी को संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले की विवेचना चोलापुर थाना प्रभारी से न कराकर किसी अन्य स्वतंत्र राजपत्रित अधिकारी से कराने का आदेश दिया है, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके। कोर्ट ने जांच पूरी कर उसकी आख्या 15 दिनों के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।

सुशीला देवी ने लगाए ये गंभीर आरोप

सुशीला देवी का आरोप है कि 22 जुलाई 2026 की रात चोलापुर थाने में तैनात उपनिरीक्षक संध्या जायसवाल और अन्य पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे। आरोप है कि पुलिसकर्मी उनके बेटे रोहित को जबरदस्ती घर से उठाकर ले गए और उसे बिना किसी अपराध के कई दिनों तक थाने में रखा।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके बेटे के साथ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और अपशब्द कहे। इसके अलावा उसे झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

कोर्ट में पेश किए तकनीकी साक्ष्य

सुशीला देवी ने अपने आरोपों के समर्थन में अदालत के समक्ष कई साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। इनमें वाइस रिकॉर्डिंग, कॉल रिकॉर्डिंग, जनसुनवाई पोर्टल की रसीद और अन्य तकनीकी साक्ष्य शामिल हैं।

इन आरोपों को लेकर अदालत ने चोलापुर पुलिस से मामले में आख्या तलब की थी। पुलिस की ओर से दाखिल की गई आख्या और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने दोनों में विरोधाभास पाया।

पुलिस की आख्या से कोर्ट ने जताई असहमति

अदालत ने पुलिस की ओर से पेश की गई रिपोर्ट पर असहमति जताते हुए मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच कराने का आदेश दिया। साथ ही जांच चोलापुर थाने से बाहर के स्वतंत्र राजपत्रित अधिकारी से कराने का निर्देश दिया गया है।

अब संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद स्वतंत्र अधिकारी मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच करेंगे। 15 दिन के भीतर जांच की प्रगति/आख्या अदालत में पेश करनी होगी।