अमेरिका में दिए बयान पर राहुल गांधी घिरे, वाराणसी कोर्ट ने जारी किया नोटिस
Varanasi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। वाराणसी की विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुर्वेद विक्रम सिंह की अदालत ने राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 29 जनवरी 2026 तय की है और राहुल गांधी को बयान दर्ज कराने का आदेश दिया है।
मामला क्या है?
यह मामला एक निजी वादी द्वारा दायर निगरानी वाद से जुड़ा है। वादी का आरोप है कि राहुल गांधी ने अमेरिका यात्रा के दौरान भारत के बारे में आपत्तिजनक बयान दिए थे। आरोप के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा था कि "भारत में सिख समुदाय को आजादी नहीं है"। वादी का दावा है कि इस तरह के बयान से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा और इससे देश में गृह युद्ध जैसे हालात पैदा होने का खतरा उत्पन्न हो सकता था।
पहले अर्जी खारिज, अब निगरानी वाद पर सुनवाई
गौरतलब है कि इसी मामले में पहले अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) एमपी-एमएलए कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2025 को वादी की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद वादी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए निगरानी वाद दाखिल किया, जिस पर अब विशेष न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई हो रही है।
पिछली सुनवाई में अदालत ने विपक्षी पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी करने का आदेश दिया था। अब उसी आदेश के अनुपालन में राहुल गांधी को विधिवत नोटिस भेजा गया है।
अदालत का आदेश और अगली तिथि
अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को होगी, जिसमें राहुल गांधी का बयान दर्ज किया जाना है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राहुल गांधी या उनके अधिवक्ता इस मामले में अदालत के समक्ष क्या पक्ष रखते हैं।
यह प्रकरण राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि मामला सीधे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष से जुड़ा हुआ है। राहुल गांधी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और पार्टी कानूनी रूप से इसका जवाब देगी।
राहुल गांधी का अमेरिका दौरा और विवादित बयान
राहुल गांधी ने अमेरिका में विभिन्न विश्वविद्यालयों और थिंक टैंक्स में भारत की लोकतांत्रिक स्थिति पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि भारत में अल्पसंख्यकों, खासकर सिख समुदाय के साथ भेदभाव हो रहा है और उन्हें पूर्ण आजादी नहीं मिल रही। इन बयानों को लेकर बीजेपी और अन्य दलों ने कड़ी आलोचना की थी। कांग्रेस ने तब इसे राहुल गांधी की राय बताया था और कहा था कि वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए बोल रहे हैं।
अब 29 जनवरी को राहुल गांधी को अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा। अगर वे व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होते हैं तो उनके वकील बयान दर्ज करा सकते हैं। यह मामला राहुल गांधी की राजनीतिक छवि और लोकसभा में उनकी भूमिका पर असर डाल सकता है।