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वाराणसी: डीआईजी कार्यालय की संपत्ति पर फर्जी दस्तावेजों से कब्जे की कोशिश, 6 पर FIR

वाराणसी में डीआईजी कार्यालय और सरकारी आवास की राज्य संपत्ति पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जे की कथित साजिश का मामला सामने आया है। कैंट थाने में छह नामजद समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस सरकारी अभिलेखों में हेरफेर और फर्जी वसीयत के आरोपों की जांच कर रही है।
 

वाराणसी: उत्तर प्रदेश राज्य संपत्ति की भूमि पर कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा करने की बड़ी साजिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) कार्यालय और सरकारी आवास से संबंधित सरकारी भूमि को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निजी नाम पर दर्ज कराने की कोशिश की गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद कैंट थाने में छह नामजद समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

डीआईजी कार्यालय की सरकारी संपत्ति पर नामांतरण की कोशिश का आरोप

क्षेत्रीय लेखपाल ऋषि दुबे की ओर से दर्ज कराई गई तहरीर के अनुसार, नगर निगम के असेसमेंट रजिस्टर में डीआईजी कॉलोनी स्थित भवन संख्या एस-8/108 ए-3 (आराजी संख्या-93) पुलिस उप महानिरीक्षक कार्यालय एवं सरकारी आवास के रूप में दर्ज है। यह भूमि उत्तर प्रदेश राज्य संपत्ति के अधीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। आरोप है कि इस सरकारी संपत्ति को निजी स्वामित्व में दर्ज कराने के उद्देश्य से लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी नाम दर्ज कराने का आरोप

पुलिस के अनुसार, सबसे पहले स्वर्गीय आनंद अग्रवाल ने कथित तौर पर नगर निगम को गुमराह कर इस सरकारी संपत्ति का नामांतरण अपने नाम करा लिया था। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र गुंजन अग्रवाल ने 29 सितंबर 2018 को एक कथित अपंजीकृत वसीयत के आधार पर स्वयं को संपत्ति का उत्तराधिकारी बताते हुए न्यायालय में प्रतिस्थापन प्रार्थना पत्र दाखिल किया।

हालांकि, राज्य सरकार की ओर से आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई की। आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने पर 18 नवंबर 2022 को न्यायालय ने कथित वसीयत को स्वीकार करने से इनकार करते हुए प्रतिस्थापन आवेदन खारिज कर दिया था।

फिर भी नहीं रुका प्रयास, सरकारी अभिलेखों में हेरफेर का आरोप

लेखपाल की तहरीर में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय से राहत न मिलने के बावजूद उसी कथित फर्जी वसीयत और अन्य दस्तावेजों के आधार पर सरकारी संपत्ति पर अधिकार जताने और नामांतरण कराने का प्रयास जारी रखा गया।

इतना ही नहीं, सरकारी अभिलेखों में हेरफेर कर राज्य संपत्ति को निजी नाम पर दर्ज कराने की साजिश भी रची गई, जिससे सरकारी भूमि को अवैध रूप से निजी स्वामित्व में दिखाया जा सके।

छह लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा

कैंट थाना प्रभारी राजकिशोर पांडेय ने बताया कि मामले में स्मृता गोयल, इला अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, शरद अग्रवाल, मयंक अग्रवाल और गुंजन अग्रवाल को नामजद किया गया है। इनके अलावा अन्य अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस जुटी जांच में

पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। सभी दस्तावेजों की वैधानिक जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव किस आधार पर किया गया तथा इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।