काशी में इस बार दिखेगा दुर्गा पूजा का भव्य रूप, बद्रीनाथ और अंकोरवाट की तर्ज पर बन रहे भव्य पंडाल
वाराणसी: शारदीय नवरात्र के साथ ही काशी में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। सप्तमी से विजयदशमी तक चार दिनों में शहर का माहौल ऐसा हो जाता है कि काशी को मिनी बंगाल कहा जाने लगता है। इस बार जिले में 512 सार्वजनिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इनमें 15 स्थानों पर बड़े और आकर्षक पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। कई जगहों पर इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं भी स्थापित करने की तैयारी है।
केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के मुताबिक, हथुआ मार्केट, सनातन धर्म इंटर कॉलेज, जंगमबाड़ी, मच्छोदरी और शिवपुर मिनी स्टेडियम समेत प्रमुख स्थानों पर इस बार पंडाल विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
सनातन धर्म इंटर कॉलेज में 30 फीट की प्रतिमा
नई सड़क स्थित सनातन धर्म इंटर कॉलेज में इस बार मां दुर्गा की 30 फीट ऊंची और 15 फीट चौड़ी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। आयोजकों का दावा है कि यह उत्तर प्रदेश में सबसे ऊंची दुर्गा प्रतिमाओं में से एक होगी।
कार्यवाहक अध्यक्ष सूरज जायसवाल के मुताबिक, यहां बदरीनाथ मंदिर की तर्ज पर करीब 60 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल के अंदर पांच मिनट का इलेक्ट्रिक शो भी होगा। इसमें नूतन बालक, मां गंगा, महादेव और मां दुर्गा के दर्शन कराए जाएंगे। प्रतिमा तैयार करने के लिए बंगाल से आए 35 कारीगर काम कर रहे हैं। कारीगर बांस, पुआल और गंगा की मिट्टी से प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं।
हथुआ मार्केट में दिखेगा अंकोरवाट मंदिर का रूप
हथुआ मार्केट स्थित प्रीमियर बॉयज क्लब इस बार कंबोडिया के अंकोरवाट स्थित विष्णु मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार कर रहा है। पंडाल का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसकी ऊंचाई करीब 80 से 90 फीट रखी जा रही है। यहां भी श्रद्धालुओं के लिए तीन से चार मिनट का इलेक्ट्रिक शो आकर्षण का केंद्र होगा। पंडाल और शो के जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक थीम को दर्शाने की तैयारी है।
शिवपुर में केदारनाथ, मैदागिन में दिखेगा अलग अंदाज
शिवपुर मिनी स्टेडियम में इस बार पंडाल को केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। वहीं मैदागिन स्थित टाउन हॉल में सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की ओर से अलग थीम पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
यहां मां दुर्गा को छत्रपति शिवाजी को तलवार भेंट करते हुए दर्शाया जाएगा। प्रतिमा को गंगा की मिट्टी से तैयार किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, प्रतिमा बनाने में किसी तरह के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
मां दुर्गा को रोज तीन घंटे सुनाया जाएगा शास्त्रीय संगीत
मैदागिन के टाउन हॉल में इस बार पूजा के दौरान एक और खास व्यवस्था की गई है। आयोजकों के अनुसार, रोजाना शाम मां दुर्गा को करीब तीन घंटे शास्त्रीय संगीत सुनाया जाएगा।