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डुप्लीकेट HSRP बनाकर वाहन मालिकों से धोखाधड़ी, फर्जी बार कोड से ऐसे हो रहा खेल, दुकानदारों पर दर्ज होगा मुकदमा

वाराणसी के नदेसर में डुप्लीकेट हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और फर्जी बार कोड स्टीकर लगाने का मामला सामने आया है। परिवहन विभाग ने ऐसे दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी है। जानिए HSRP के नियम, जुर्माने की राशि और असली नंबर प्लेट पहचानने का तरीका।

 

वाराणसी: वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने की अनिवार्यता के बीच वाराणसी के नदेसर में डुप्लीकेट नंबर प्लेट बनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ दुकानदार फर्जी एचएसआरपी बनाकर वाहनों पर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं, वाहन मालिकों को असली प्लेट का भरोसा दिलाने के लिए फर्जी बार कोड के स्टीकर भी लगाए जा रहे हैं। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। फर्जी या डुप्लीकेट नंबर प्लेट वाले वाहनों का चालान भी किया जाएगा।

वाराणसी में केवल अधिकृत डीलर ही लगा सकते हैं HSRP

परिवहन विभाग के अनुसार, जिले में वाहन डीलर के अलावा किसी बाहरी दुकानदार को हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का अधिकार नहीं है। इसके लिए जिले में सिर्फ दो वेंडरों को टाटा, टोयोटा समेत चार वाहन कंपनियों की नंबर प्लेट लगाने का ठेका दिया गया है।

नए वाहनों में एचएसआरपी लगाने की जिम्मेदारी डीलर की है, जबकि पुराने वाहनों में नंबर प्लेट लगाने का काम संबंधित वाहन के नजदीकी डीलर को सौंपा गया है। विभाग के मुताबिक, नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया से ही एचएसआरपी लगवानी चाहिए।

जिले में 8.96 लाख वाहनों में लगी HSRP

परिवहन कार्यालय में पंजीकृत कुल 14,92,343 वाहनों में से 8,96,608 वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहनों में एचएसआरपी लगना बाकी है।

परिवहन विभाग ने जनवरी से सितंबर तक डुप्लीकेट नंबर प्लेट लगाने या नंबर प्लेट नहीं लगाने वाले 269 वाहनों पर जुर्माना लगाया। वहीं, ट्रैफिक पुलिस ने इसी अवधि में ऐसी अनियमितताओं के लिए 8,623 वाहनों का चालान किया।

HSRP नहीं होने पर 5,000 रुपये का जुर्माना

वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं होने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। दूसरी बार पकड़े जाने पर जुर्माने की राशि 10 हजार रुपये हो जाती है।

फर्जी नंबर प्लेट के जरिए चोरी के वाहनों के इस्तेमाल और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए शासन ने जनवरी 2019 से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य कर दी थी। नए वाहन में एचएसआरपी लगाने और उसे प्रमाणित करने के बाद ही परिवहन कार्यालय से पंजीयन किताब जारी की जाती है। इस प्रक्रिया के कारण वाहन मालिकों को आरसी के लिए करीब एक महीने तक इंतजार भी करना पड़ सकता है।

ऐसे करें असली हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की पहचान

वाहन मालिक कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देकर असली और फर्जी एचएसआरपी के बीच अंतर पहचान सकते हैं।

IND का निशान: नंबर प्लेट पर लगे स्टीकर पर IND लिखा होना चाहिए। सीरियल नंबर और बार कोड: नंबर प्लेट के आगे और पीछे सीरियल नंबर यानी बार कोड होता है।

वेबसाइट पर जांच: नंबर प्लेट का बार कोड निर्धारित वेबसाइट पर दर्ज किया जाता है। यदि उसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो प्लेट के फर्जी होने की आशंका है।

फर्जी नंबर प्लेट बनाने वालों पर होगी कार्रवाई

आरटीओ (प्रवर्तन) मनोज वर्मा ने बताया कि नए वाहनों में एचएसआरपी डीलर लगाते हैं, जबकि पुराने वाहनों में इसे लगाने की जिम्मेदारी नजदीकी डीलर को दी गई है। जांच के दौरान डुप्लीकेट नंबर प्लेट या बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर जुर्माना लगाया जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि दुकानदार डुप्लीकेट या फर्जी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बना रहे हैं, तो उनके खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों पर भी कार्रवाई की जाएगी।