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वाराणसी गंगा इफ्तार केस: 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने बताया गंभीर अपराध

 

वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी और नाविक के कथित अपहरण के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला जज की अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार सभी 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है और उन्हें दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया है।

जिला जज कोर्ट में लंबी बहस के बाद फैसला

मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में हुई, जहां सुबह करीब 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक दोनों पक्षों के वकीलों ने जोरदार बहस की।

सेशन जज आलोक कुमार की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद करीब 6 पन्नों का आदेश जारी करते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। फैसला सुनते ही अदालत परिसर में मौजूद आरोपियों के परिजन भावुक हो गए, वहीं आरोपी भी शांत नजर आए।

कोर्ट ने बताया-सोची-समझी साजिश

मुकदमा दर्ज कराने वाले पक्ष के वकील नित्यानंद राय के अनुसार, अदालत ने माना कि यह घटना जानबूझकर की गई थी और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

उन्होंने कहा कि जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त घाटों पर गंगा आरती और पूजा-पाठ चल रहा था। ऐसे संवेदनशील माहौल में नदी के बीच इस तरह की गतिविधि को गंभीर अपराध माना गया।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 16 मार्च की है, जब गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। इसमें रोजेदारों को फल, मेवे के साथ चिकन बिरयानी परोसी गई थी।

इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विवाद खड़ा हो गया। हिंदूवादी संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई और मामला पुलिस तक पहुंचा।

8 घंटे में 14 आरोपी गिरफ्तार

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए महज 8 घंटे के भीतर 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

सभी आरोपी वाराणसी के मदनपुरा इलाके के ताड़तल्ला के रहने वाले हैं और अधिकांश एक ही परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनकी उम्र 19 से 25 साल के बीच है।

पहले भी खारिज हो चुकी है जमानत

इससे पहले भी आरोपियों की जमानत अर्जी सीजेएम कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी थी। अब जिला जज कोर्ट से भी राहत न मिलने के बाद सभी आरोपियों को जेल में ही रहना होगा।