टीबी मुक्त अभियान में वाराणसी को मिली बड़ी सफलता, 387 ग्राम पंचायतें हुई TB मुक्त
Varanasi : विश्व क्षय रोग दिवस (World Tuberculosis Day) के अवसर पर मंगलवार को कबीर चौरा स्थित मंडलीय चिकित्सालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जनपद वाराणसी में चल रहे टीबी मुक्त अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धियां साझा की गईं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले की कुल 694 ग्राम पंचायतों में से 387 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता और प्रभावी प्रयासों का परिणाम है।
जानकारी के मुताबिक, इन 387 ग्राम पंचायतों में से 19 पंचायतें लगातार तीसरे वर्ष, 235 पंचायतें दूसरे वर्ष और 133 पंचायतें पहली बार टीबी मुक्त श्रेणी में शामिल हुई हैं। अभियान के तहत जिले में अब तक लगभग 1.25 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। लगातार तीसरी बार टीबी मुक्त घोषित होने वाली ग्राम पंचायतों को महात्मा गांधी की स्वर्ण रंग की प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पूर्व मंत्री एवं शहर दक्षिणी विधायक नीलकंठ तिवारी ने कहा कि वाराणसी ने सामाजिक और स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता ही टीबी मुक्त अभियान की सफलता का प्रमुख आधार है। इस अवसर पर उन्होंने 50 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की और 5 निक्षय मित्रों तथा 3 टीबी चैंपियनों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सम्मानित निक्षय मित्रों में डॉ. स्वर्णलता सिंह, डॉ. कामाख्या जायसवाल, उजाला हॉस्पिटल रामनगर, गंगा सेवा सदन अस्पताल तथा रोटरी क्लब वाराणसी नॉर्थ शामिल रहे।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि जनपद में 23 टीबी यूनिट्स पर इलाज की सुविधा उपलब्ध है और 12 नांट केंद्रों पर उच्च गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। सभी मरीजों को निःशुल्क जांच और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश प्रसाद ने कहा कि जिला प्रशासन ने वाराणसी को पूर्णतः टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए आम जनता, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक तंत्र के बीच समन्वय और सहयोग बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार, डीटीओ, सीएमओ, रोटरी क्लब के पदाधिकारी, डिप्टी डीटीओ वाराणसी, सम्मानित ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान तथा एनटीईपी परिवार के सदस्य मौजूद रहे। यह अभियान न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्धि है, बल्कि ग्रामीण समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण भी बनकर उभर रहा है।