ज्ञानवापी केस में पुनरीक्षण याचिका पर 10 सितंबर को होगी सुनवाई, मूल पत्रावली नहीं मिलने पर कोर्ट ने दी नई तारीख
वाराणसी: ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को दर्शन-पूजन का अधिकार देने की मांग को लेकर वर्ष 1991 में दाखिल मुकदमे से जुड़े एक मामले में शनिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। मुकदमे की मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने के कारण विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत ने पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई के लिए अब 10 सितंबर की तारीख तय की है।
यह पुनरीक्षण याचिका मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने और वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने से संबंधित प्रार्थना पत्रों को एक साथ सुनने से जुड़े आदेश के खिलाफ दाखिल की गई है।
हरिहर पांडेय की तीन बेटियों ने मांगा पक्षकार बनाए जाने का अधिकार
मामले के वादी पक्षकारों में शामिल हरिहर पांडेय का निधन हो चुका है। इसके बाद उनकी तीन बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेनू पांडेय ने मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
इस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान तीनों बहनों की ओर से अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने मुकदमे के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने के लिए भी प्रार्थना पत्र दिया।
अधिवक्ता की ओर से दोनों प्रार्थना पत्रों की एक साथ सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया गया था।
सिविल जज की अदालत ने खारिज कर दिया था प्रार्थना पत्र
इस मामले में सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) भावना भारतीय ने 11 जुलाई 2025 को आदेश पारित किया था। अदालत ने दोनों प्रार्थना पत्रों की एक साथ सुनवाई किए जाने के अनुरोध को पोषणीय नहीं मानते हुए उसे खारिज कर दिया था।
सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत के इसी आदेश के खिलाफ मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेनू पांडेय की ओर से पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई है।
मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने से टली सुनवाई
पुनरीक्षण याचिका पर शनिवार को विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत में सुनवाई होनी थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान मुकदमे की मूल पत्रावली अदालत में उपलब्ध नहीं हो सकी।
मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अदालत ने शनिवार को मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ाई। कोर्ट ने अब पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
अब 10 सितंबर को होगी सुनवाई
इस तरह ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के मूल मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने और वादमित्र को हटाने की मांग से संबंधित पुनरीक्षण याचिका पर अब अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। उस दिन मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सुनवाई होने की उम्मीद है।