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वाराणसी: नगर निगम के फैसले के विरोध में मीट-मछली व्यापारियों ने बंद की दुकानें, बोले- मांगें नहीं मानी तो करेंगे बड़ा आंदोलन

 

वाराणसी। नगर निगम की ओर से मीट और मछली की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में बुधवार को वाराणसी के मीट और मछली कारोबारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक बंद रखा। इस दौरान शहर के अधिकांश प्रमुख बाजारों और मंडियों में मीट एवं मछली की दुकानें बंद रहीं, जिससे कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा।



चौकाघाट, पुराना पुल, रामनगर, लहरतारा, सुंदरपुर, मंडुवाडीह, लल्लापुरा, शिवपुर, शिवाला, लंका, सोनारपुरा, चितईपुर, नई सड़क, रेवड़ी तालाब, बौलिया समेत शहर के कई इलाकों में व्यापारियों ने बंद का समर्थन किया। व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम का प्रस्ताव हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डालेगा।

संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला

बंदी के दौरान व्यापारियों ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) प्रत्येक नागरिक को वैध व्यवसाय करने का अधिकार देता है। उनका कहना था कि बिना सामाजिक-आर्थिक सर्वे, पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था और संबंधित पक्षों से संवाद किए दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करना उचित नहीं है। व्यापारियों ने अन्य संवैधानिक प्रावधानों का भी उल्लेख करते हुए रोजगार सुरक्षा और पुनर्वास की मांग उठाई।



बिना वैकल्पिक व्यवस्था विस्थापन स्वीकार नहीं

व्यापारियों का कहना है कि यदि दुकानों को स्थानांतरित करना आवश्यक है, तो पहले उपयुक्त स्थान, आधारभूत सुविधाएं और सभी पक्षों से सहमति सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका दावा है कि इस निर्णय से व्यापारी ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े कर्मचारी, मजदूर और अन्य परिवार भी प्रभावित होंगे।

वार्ता की मांग, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

व्यापारियों ने नगर निगम से मांग की कि दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए और प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर सर्वसम्मति से समाधान निकाला जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



इस बंदी में शहर की विभिन्न मीट और मछली मंडियों के व्यापारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। व्यापारियों ने बंद को सफल बनाने में सहयोग देने वाले नागरिकों, सामाजिक संगठनों और मीडिया का भी आभार व्यक्त किया।