वाराणसी में CM आवासीय विद्यालय के लिए जमीन पर चला बुलडोजर, महिलाओं ने रोका रास्ता, पुलिस ने संभाला मोर्चा
वाराणसी के पिंडरा तहसील क्षेत्र के मानापुर-चनौली गांव में मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई के दौरान किसानों और महिलाओं ने विरोध किया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने जेसीबी से अभियान जारी रखा। मामला पहले से हाईकोर्ट में विचाराधीन होने का दावा भी किया गया।
वाराणसी: पिंडरा तहसील क्षेत्र के मानापुर-चनौली गांव में मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालय के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर रविवार को एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में जेसीबी के जरिए भूमि कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई शुरू हुई। इस दौरान किसानों और ग्रामीण महिलाओं ने विरोध जताया, लेकिन पुलिस और प्रशासन के सख्त रुख के आगे उनका विरोध ज्यादा देर तक नहीं टिक सका।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शुरू हुआ अभियान
मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालय के निर्माण के लिए प्रस्तावित भूमि पर कब्जा दिलाने के उद्देश्य से रविवार सुबह प्रशासनिक टीम जेसीबी मशीनों के साथ गांव पहुंची। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मौके पर 150 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
कपसेठी, जंसा, फूलपुर, सिंधोरा और बड़ागांव थानों की पुलिस के अलावा एसीपी पिंडरा प्रशांत सिंह, एसडीएम, तहसीलदार कुलवंत सिंह, नायब तहसीलदार, कानूनगो और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
महिलाओं ने किया विरोध, प्रशासन से हुई नोकझोंक
भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं मौके पर पहुंच गईं और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करने लगीं। महिलाओं ने दावा किया कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और जब तक न्यायालय का फैसला नहीं आ जाता, तब तक भूमि पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
कुछ देर तक प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी पक्ष के पास हाईकोर्ट का स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) है तो उसे मौके पर प्रस्तुत किया जाए। अधिकारियों ने कहा कि बिना वैध न्यायालयी आदेश के सरकारी कार्रवाई नहीं रोकी जाएगी।
कोर्ट का आदेश लेकर आइए, कहकर जारी रखा काम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध कर रही महिलाओं से अधिकारियों ने कहा कि यदि उनके पास अदालत का कोई आदेश है तो उसे दिखाएं। जब मौके पर कोई स्थगन आदेश प्रस्तुत नहीं किया जा सका, तो पुलिस ने महिलाओं को वहां से हटाया और भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जारी रखी। इसके बाद प्रशासन की निगरानी में जेसीबी मशीनों से भूमि कब्जामुक्त कराने का अभियान चलता रहा।
पहले भी विरोध के कारण लौटना पड़ा था प्रशासन
यह पहला मौका नहीं है जब इस परियोजना को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालय के लिए प्रस्तावित करीब छह एकड़ भूमि के सीमांकन का प्रयास किसानों के विरोध के चलते पूरा नहीं हो सका था।
उस समय ग्रामीणों ने भी यही तर्क दिया था कि मामला हाईकोर्ट में लंबित है और न्यायालय के निर्णय तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। विरोध बढ़ने पर प्रशासन और कार्यदायी संस्था को कई घंटे की मशक्कत के बाद वापस लौटना पड़ा था।
प्रशासन ने नहीं बदला रुख
रविवार को प्रशासन पूरी तैयारी के साथ गांव पहुंचा था। अधिकारियों ने साफ कर दिया कि सरकारी परियोजना से जुड़ी कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी और यदि किसी पक्ष के पास न्यायालय का वैध स्थगन आदेश होगा, तभी कार्य रोका जाएगा।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कराने के लिए राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर डटी हुई है।