वाराणसी में नई पुलिसिंग व्यवस्था, यक्ष ऐप से सिपाही-दारोगा की हर मूवमेंट होगी ट्रैक
वाराणसी पुलिस अब ‘यक्ष ऐप’ के जरिए बीट और हल्का की डिजिटल निगरानी करेगी। पुलिसकर्मियों को क्षेत्र में पहुंचकर ही रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। ऐप से अपराधियों की ट्रैकिंग, आवाज पहचान और क्राइम कंट्रोल को तकनीक आधारित बनाया जाएगा। व्यवस्था 2–3 माह में लागू होगी।
वाराणसी: फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों की ड्यूटी अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। बीट और हल्का में पहुंचे बिना उनकी ड्यूटी अधूरी मानी जाएगी। इसके लिए कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस जल्द ही ‘यक्ष ऐप’ के जरिए थाना और चौकी स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों की डिजिटल निगरानी शुरू करने जा रही है।
इस ऐप के जरिए पुलिसकर्मी अपने निर्धारित कार्य क्षेत्र में भौतिक रूप से पहुंचने के बाद ही निगरानी रिपोर्ट भर सकेंगे। पुलिसिंग को पूरी तरह तकनीक आधारित और जवाबदेह बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो दो से तीन माह में यह व्यवस्था धरातल पर लागू हो जाएगी।
1068 बीट और हल्का डिजिटल मैप पर
कमिश्नरेट वाराणसी क्षेत्र में बीट और हल्का के कुल 1068 इलाके चिन्हित किए गए हैं। इन सभी क्षेत्रों का विस्तृत डेटा ‘यक्ष ऐप’ में फीड किया जा रहा है। ऐप में थानावार बीट और हल्का की जानकारी के साथ आबादी, महिला अपराध, जमीन विवाद, हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर और सक्रिय बदमाशों का पूरा विवरण उपलब्ध रहेगा।
केवल अधिकृत पुलिसकर्मी ही कर सकेंगे उपयोग
‘यक्ष ऐप’ हर सिपाही और दारोगा के मोबाइल में अपलोड किया जाएगा, लेकिन इसे केवल वही पुलिसकर्मी खोल सकेंगे जिन्हें संबंधित क्षेत्र आवंटित होगा। ऐप खोलने के लिए ओटीपी आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। क्षेत्र में पहुंचने पर ही ऐप सक्रिय होगा और तभी निगरानी रिपोर्ट सबमिट की जा सकेगी।
पूरे यूपी में बदमाशों की आसान ट्रैकिंग
यदि कोई पुलिसकर्मी किसी हिस्ट्रीशीटर के घर पहुंचता है और वह वहां मौजूद नहीं मिलता, तो उसके परिजनों द्वारा बताए गए संभावित ठिकाने की जानकारी तुरंत ऐप पर अपलोड की जाएगी। इसके बाद उस स्थान पर तत्काल निगरानी शुरू हो सकेगी। इस तरह बदमाशों की मूवमेंट की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव होगी।
आवाज की फ्रिक्वेंसी से होगी अपराधियों की पहचान
बदमाश पुलिस से बचने के लिए वेश बदलने या सर्जरी जैसे हथकंडे अपनाते हैं। इससे निपटने के लिए ‘यक्ष ऐप’ में गिरफ्तार अपराधियों की आवाज की फ्रिक्वेंसी भी स्टोर की जा रही है, जिससे पहचान में मदद मिलेगी।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि गांव और शहर से जुड़ी अधिकांश जानकारियां ऐप में अपलोड की जा चुकी हैं। पुलिसकर्मियों को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बीट और हल्का में जाकर निगरानी रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य होगा, और इसका असर जल्द ही क्राइम कंट्रोल में दिखाई देगा।