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रंगभरी एकादशी पर आज बाबा विश्वनाथ का गौना, काशी में उमड़ा आस्था का सैलाब

वाराणसी में रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ और मां गौरा की पालकी यात्रा निकाली गई। आज गौना संस्कार होगा और काशी में होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है। सुरक्षा कारणों से पालकी के साथ केवल 64 श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति दी गई है।

 

वाराणसी: धर्मनगरी काशी में रंगभरी एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर Kashi Vishwanath और मां गौरा की चल प्रतिमा पारंपरिक पालकी में सवार होकर निकाली गई। आज काशी की प्राचीन परंपरा के अनुसार भगवान शिव और माता गौरा का गौना संस्कार संपन्न होगा।

रंगभरी एकादशी को काशी में होली पर्व की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के बाद इस दिन बाबा विश्वनाथ अपनी अर्धांगिनी को विदा कराकर काशी लाते हैं। इसी परंपरा के तहत भक्त बाबा के भाल पर गुलाल लगाते हैं और माता पार्वती के चरणों में अबीर अर्पित कर होली खेलने की अनुमति मांगते हैं।

पुष्पों की होली और धार्मिक उल्लास

काशीवासी और ब्रज के बाल-गोपाल व गोपियां बाबा के आंगन में पुष्पों की होली खेलेंगे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। प्रशासन की ओर से विशेष सुरक्षा और व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

श्री काशी विश्वनाथ टेंपल ट्रस्ट द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई और अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई है।

64 श्रद्धालुओं को ही पालकी संग प्रवेश

परंपरा के अनुसार पूर्व महंत आवास से निकलने वाली शोभायात्रा में पालकी के साथ केवल 64 श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई है। सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह संख्या सीमित रखी गई है। परिवार की सहमति से चिह्नित व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जाएगा।