वाराणसी: 54.91 लाख की साइबर ठगी में बड़ा खुलासा, बैंक की त्वरित कार्रवाई के बावजूद 24 लाख रुपये म्यूल खातों में पहुंचे
वाराणसी I वाराणसी में साइबर ठगों ने बैंककर्मियों को भी चकमा देते हुए 54.91 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया। बैंक की ओर से त्वरित सूचना दिए जाने के बावजूद ठगी की रकम में से 24 लाख रुपये म्यूल खातों के जरिए आगे ट्रांसफर कर दिए गए। साइबर पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया है।
मामले में एडीसीपी की ओर से 48 लाख रुपये होल्ड कराने की बात कही गई थी, लेकिन जांच के दौरान करीब 30 लाख रुपये होल्ड होने की जानकारी सामने आई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की साइबर टीम भी पुलिस को आवश्यक तथ्य और तकनीकी इनपुट उपलब्ध करा रही है।
खाताधारक बनकर किया फोन
पूरा मामला बीएचयू स्थित एसबीआई शाखा से जुड़ा है। एसबीआई के मुख्य प्रबंधक रविश ठाकुर ने साइबर थाना में केस दर्ज कराया था। शिकायत के अनुसार, एक सितंबर की शाम करीब 4:29 बजे साइबर ठग ने खुद को बैंक का खाताधारक बताते हुए मुख्य प्रबंधक को फोन किया।
ठग ने बताया कि उसने रुपये ट्रांसफर करने के लिए ई-मेल भेजा है। उसने यह भी कहा कि चेकबुक खत्म हो गई है और वह कुछ ही मिनट में बैंक पहुंचकर आरटीजीएस वाउचर पर हस्ताक्षर कर देगा। उसकी बातों पर भरोसा करते हुए बैंक से तीन अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर दी गई।
तीन खातों में भेजे गए 54.91 लाख
बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, अब्दुल के खाते में 28,20,801 रुपये, मो. आरिफ के खाते में 17,15,109 रुपये और धीरज कुमार के खाते में 9,55,900 रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 54,91,810 रुपये की रकम भेजी गई।
हालांकि, कुछ ही मिनट बाद वास्तविक खाताधारक बैंक पहुंचा और स्पष्ट किया कि उसने रुपये ट्रांसफर करने के लिए कोई ई-मेल नहीं भेजा था। इसके बाद बैंक अधिकारियों को ठगी का पता चला और साइबर पुलिस को सूचना दी गई।
म्यूल खातों के जरिए रकम ठिकाने लगाने का आरोप
साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि शुरुआती तीन खातों में रकम पहुंचने के बाद ठगों ने उसे म्यूल खातों के जरिए आगे ट्रांसफर कर दिया। पुलिस के अनुसार, त्वरित कार्रवाई के बावजूद ठगी की रकम का एक हिस्सा दूसरे खातों में भेज दिया गया।
एसीपी साइबर क्राइम अपूर्व पांडेय ने बताया कि आरोपितों की पहचान के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। साइबर टीम ने कई महत्वपूर्ण इनपुट जुटाए हैं और एसबीआई की साइबर टीम से भी आवश्यक जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपितों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।