Varanasi : शास्त्री घाट पर संजय सिंह की पदयात्रा का समापन, BJP पर जमकर बरसे, बोले- देश में...
वाराणसी। आम आदमी पार्टी की रोजगार और सामाजिक न्याय पदयात्रा का गुरुवार को काशी के शास्त्री घाट पर जनसभा के साथ समापन हुआ। इस पदयात्रा का नेतृत्व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने किया। शास्त्री घाट पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए और मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने केंद्र व प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा।
संजय सिंह ने बताया कि यह पदयात्रा 16 जनवरी को मिर्जापुर के शहीद उद्यान से शुरू हुई थी, जो रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे अहम मुद्दों को लेकर निकाली गई। यात्रा का समापन वाराणसी के शास्त्री घाट पर हुआ। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान उन्हें जनता का व्यापक समर्थन मिला और हर वर्ग के लोगों ने इसमें भागीदारी की।
उन्होंने बताया कि पदयात्रा में गरीब, बुनकर, युवा, शिक्षक भर्ती में गड़बड़ियों से परेशान अभ्यर्थी, आशा कार्यकर्ता, भूमि व रोजगार सेवक सहित समाज के कई तबके जुड़े। यह पदयात्रा कुल आठ चरणों में प्रस्तावित है, जिनमें से अब तक तीन चरण पूरे हो चुके हैं।
संजय सिंह ने कहा कि यात्रा के दौरान दो प्रमुख मांगों को जनता के सामने रखा गया। पहली मांग युवाओं को रोजगार देने की है, और यदि सरकार रोजगार नहीं दे सकती तो युवाओं को 10 हजार रुपये प्रति माह बेरोजगारी भत्ता दिया जाए, जिसके बदले उनसे प्रतिदिन दो घंटे का कार्य लिया जाए। दूसरी मांग यह है कि सरकारी और निजी स्कूलों तथा कॉलेजों में संविधान की शिक्षा को अनिवार्य किया जाए।
उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान दालमंडी और मणिकर्णिका घाट से जुड़े स्थानीय मुद्दे भी लोगों ने उठाए, जिन पर उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज की गई है। संजय सिंह ने कहा कि इन सभी मुद्दों को वह संसद और प्रधानमंत्री के सामने मजबूती से रखेंगे।
प्रयागराज में जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को 72 घंटे के भीतर दो बार नोटिस दिए जाने के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय सिंह ने इसे अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं शंकराचार्य से फोन पर बात कर उन्हें अपना समर्थन दिया है। उनका आरोप है कि कुंभ में भगदड़ से हुई मौतों और गौहत्या जैसे मुद्दे उठाने के कारण जानबूझकर शंकराचार्य को निशाना बनाया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शंकराचार्य को “कालनेमि शंकराचार्य” कहे जाने पर भी संजय सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे बेहद निंदनीय बयान बताया और सवाल उठाया कि शंकराचार्य से जुड़े संत कौन हैं और प्रशासनिक अधिकारी उनका स्वागत क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी का काम रोटियां बनाना नहीं, बल्कि प्रशासन को सही ढंग से चलाना है।
संजय सिंह ने कहा कि शंकराचार्य के साथ जो व्यवहार हुआ है, उसे देश की जनता देख रही है और इससे लोगों में गहरा आक्रोश है।