काशी में सर्व पितृ अमावस्या पर अनूठी पहल, लावारिस मृतकों और नेपाल त्रासदी के दिवंगतों का हुआ पिंडदान
सर्व पितृ अमावस्या पर वाराणसी के गंगा घाटों और प्रमुख तीर्थों पर श्रद्धालुओं ने तर्पण और पिंडदान किया। मणिकर्णिका तीर्थ पर लावारिस मृतकों और नेपाल त्रासदी में दिवंगत लोगों की आत्मशांति के लिए विशेष पिंडदान हुआ। आयोजकों के अनुसार, संस्था अब तक 1450 से अधिक लावारिस शवों का निशुल्क अंतिम संस्कार करा चुकी है।
वाराणसी: सर्व पितृ अमावस्या पर शनिवार को काशी के गंगा घाटों और प्रमुख तीर्थों पर श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य किया। भोर से ही रविदास घाट से आदि केशव तक श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। दशाश्वमेध घाट, शंकुलधारा, लक्ष्मीकुंड और पिशाच मोचन सहित कई स्थानों पर श्राद्ध कर्म हुए। इस दौरान मणिकर्णिका तीर्थ पर उन लावारिस मृतकों की आत्मशांति के लिए भी पिंडदान किया गया, जिनका अंतिम संस्कार कराने वाला कोई अपना नहीं था। नेपाल त्रासदी में जान गंवाने वालों के निमित्त भी विशेष अनुष्ठान हुआ।
गंगा घाटों से कुंडों तक पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान
सर्व पितृ अमावस्या पर सुबह से ही काशी के घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान के बाद तिल और जल से पितरों का तर्पण किया। पुरोहितों ने विधि-विधान से संकल्प कराए और लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए पिंडदान किया।
दशाश्वमेध घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। वहीं, शंकुलधारा, लक्ष्मीकुंड और पिशाच मोचन जैसे प्रमुख तीर्थों पर भी श्राद्ध कर्म संपन्न हुए। परंपरा के अनुसार पितरों के निमित्त भोजन निकालने के साथ कौआ, श्वान और गाय के लिए भी भोजन रखा गया।
असि घाट पर सिल्ट और दलदल से श्रद्धालुओं को परेशानी
श्राद्ध और पिंडदान के लिए पहुंचे लोगों को असि घाट पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बाढ़ के बाद जमा हुई सिल्ट से घाट पर दलदल जैसी स्थिति बन गई थी। इससे श्रद्धालुओं को आने-जाने और पिंडदान के लिए उपयुक्त स्थान तक पहुंचने में परेशानी हुई। कीचड़ के बीच फिसलने का खतरा बना रहा, इसके बावजूद लोगों ने अपने धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए।
जिनका कोई नहीं, उनके लिए भी किया गया पिंडदान
मणिकर्णिका तीर्थ पर सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर सेवा और श्रद्धा से जुड़ी एक विशेष पहल की गई। श्रीकाशी विश्वनाथ डमरू दल सेवा समिति, सारडा समाज सेवा फाउंडेशन और श्रीमणिकर्णिका तीर्थ न्यास की ओर से लावारिस मृतकों की आत्मशांति के लिए विश्व पिंडदान आयोजित किया गया।
इस आयोजन में नेपाल त्रासदी में दिवंगत लोगों के निमित्त भी पिंडदान किया गया। आयोजकों के अनुसार, दिवंगतों की स्मृति में 15 दिनों तक जलदान भी किया गया, ताकि जिन लोगों के लिए उनके परिजन धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर सके, उन्हें भी श्रद्धापूर्वक याद किया जा सके।
अब तक 1450 से अधिक लावारिस शवों का कराया निशुल्क अंतिम संस्कार
संस्था के प्रधान अध्यक्ष ओमनाथ शर्मा उर्फ मोनू बाबा के मुताबिक, अब तक 1450 से अधिक लावारिस शवों का निशुल्क दाह संस्कार कराया जा चुका है। सर्व पितृ अमावस्या पर ऐसे मृतकों के लिए पिंड अर्पित कर उनकी आत्मशांति की कामना की गई।
आयोजन के दौरान मणिकर्णिका घाट पर मुखाग्नि देने वाले चौधरियों को अंगवस्त्र और दक्षिणा देकर सम्मानित भी किया गया। तर्पण और पिंडदान के बाद दीपदान के साथ पितरों को विदाई दी गई।
काशी में पितरों के प्रति श्रद्धा और सेवा का संगम
सर्व पितृ अमावस्या पर काशी के घाटों पर जहां हजारों श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए, वहीं मणिकर्णिका तीर्थ पर लावारिस मृतकों और नेपाल त्रासदी के दिवंगतों के लिए पिंडदान ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। इस पहल के जरिए उन लोगों को भी स्मरण किया गया, जिनके लिए परिवार या परिजनों की ओर से श्राद्ध कर्म किए जाने की संभावना नहीं थी।