दो लापता किशोरियों को सकुशल बरामद कराने वाली SI निकिता सिंह सम्मानित
वाराणसी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने की उपनिरीक्षक निकिता सिंह को दो लापता नाबालिगों को सकुशल खोजने और उत्कृष्ट विवेचना के लिए DGP सिल्वर मेडल मिला। उन्होंने तीन साल से लापता कपसेठी की किशोरी को तकनीकी निगरानी से खोजा, जबकि Instagram के जरिए चौबेपुर की किशोरी को दिल्ली से बरामद किया।
वाराणसी: लापता नाबालिगों को खोजकर उनके परिवार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाली एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने की उपनिरीक्षक निकिता सिंह को पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने सिल्वर मेडल से सम्मानित किया। पुलिस महानिदेशक की ओर से दिया गया यह सम्मान उनके उत्कृष्ट प्रयास और प्रभावी विवेचना के लिए मिला है। डीजीपी ने महिला उपनिरीक्षक के कार्य की सराहना भी की।
तीन साल बाद मिली कपसेठी की किशोरी
सम्मान का एक प्रमुख कारण कपसेठी क्षेत्र की एक किशोरी को करीब तीन साल बाद सकुशल खोज निकालना रहा। वर्ष 2023 में किशोरी की साइकिल चोरी हो गई थी। घटना से घबराकर वह कपसेठी रेलवे स्टेशन पहुंची और ट्रेन से जौनपुर चली गई।
जौनपुर में उसकी मुलाकात एक युवक से हुई। इसके बाद वह उसके संपर्क में रहते हुए मुंबई और फिर गुजरात पहुंच गई। मुंबई में उसने नर्सिंग असिस्टेंट के रूप में काम किया, जबकि गुजरात में नट-बोल्ट बनाने वाली कंपनी में काम करने लगी।
इधर, बेटी के लापता होने के बाद परिजनों ने मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन लंबे समय तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। मामले की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक निकिता सिंह को मिलने के बाद उन्होंने जांच को नए सिरे से आगे बढ़ाया। पुलिस ने किशोरी की मां के मोबाइल नंबर की निगरानी शुरू की। इसी तकनीकी जांच के जरिए पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिला और आखिरकार करीब तीन साल से लापता किशोरी को खोज निकाला गया।
Instagram ने खोला दूसरी किशोरी का राज
इसी तरह चौबेपुर क्षेत्र की एक किशोरी Instagram के जरिए सीतापुर के एक युवक के संपर्क में आई थी। इसके बाद वह युवक के साथ दिल्ली चली गई। दोनों के मोबाइल फोन बंद होने के कारण पुलिस के सामने किशोरी तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था।
जांच के दौरान पुलिस को वह मोबाइल नंबर मिल गया, जिससे किशोरी Instagram का इस्तेमाल कर रही थी। उपनिरीक्षक निकिता सिंह ने सोशल मीडिया अकाउंट की गहनता से जांच की तो एक महत्वपूर्ण संदेश मिला। संदेश में किशोरी ने खुद को सुरक्षित बताया था और अपना ठिकाना भी बताया था। जांच आगे बढ़ाने पर पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि किशोरी गर्भवती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम बनकर दिल्ली पहुंची पुलिस
किशोरी की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सावधानी से कार्रवाई की। पुलिस टीम स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी के रूप में दिल्ली पहुंची और कैंटोनमेंट क्षेत्र में बताए गए ठिकाने की तलाश शुरू की। जांच में पता चला कि आरोपित युवक वहां माली का काम कर रहा था। पुलिस टीम उसके घर पहुंची तो किशोरी वहां मिल गई। इसके बाद उसे सकुशल बरामद कर लिया गया।
तकनीकी जांच और सूझबूझ से मिली सफलता
दोनों मामलों में उपनिरीक्षक निकिता सिंह ने तकनीकी जांच, मोबाइल निगरानी और सोशल मीडिया से मिले सुरागों का इस्तेमाल करते हुए लापता किशोरियों तक पहुंच बनाई। उनकी इसी प्रभावी विवेचना और उल्लेखनीय कार्य के लिए पुलिस महानिदेशक ने सिल्वर मेडल प्रदान किया है।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने निकिता सिंह को सम्मानित करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। यह सम्मान पुलिस विभाग में महिला अधिकारियों की भूमिका और तकनीकी जांच के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करता है।