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16 दिनों तक लक्ष्मी कुंड पर रहेगी रौनक, 18 सितंबर से शुरू होगा सोरहिया मेला, 3 अक्टूबर को जिउतिया के साथ समापन

Varanasi Sorhaiya Mela 2026: वाराणसी में ऐतिहासिक सोरहिया मेला 18 सितंबर से शुरू होगा और 3 अक्टूबर को जिउतिया व्रत के साथ इसका समापन होगा। लक्ष्मी कुंड में स्नान, मां लक्ष्मी के 16 स्वरूपों की पूजा और संतान की दीर्घायु की कामना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
 

वाराणसी: काशी में सनातन परंपरा और आस्था से जुड़ा ऐतिहासिक सोरहिया मेला 18 सितंबर से शुरू होगा। 16 दिनों तक चलने वाले इस मेले का मुख्य केंद्र लक्ष्मी कुंड और वहां स्थित मां लक्ष्मी का मंदिर रहेगा। मेले को लेकर लक्ष्मी कुंड की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, लाइटिंग और सजावट का काम तेजी से चल रहा है। आयोजन का समापन 3 अक्टूबर को जीवित्पुत्रिका यानी जिउतिया व्रत के साथ होगा।

16 दिनों तक लक्ष्मी कुंड पर होगी पूजा-अर्चना

लोक मान्यताओं के अनुसार सोरहिया मेले के दौरान लक्ष्मी कुंड में स्नान और मां लक्ष्मी के दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है। इस अवधि में श्रद्धालु लक्ष्मी कुंड में स्नान करने के बाद मां लक्ष्मी के 16 स्वरूपों का ध्यान और पूजन करते हैं।

आस्था है कि इस तरह पूजा-अर्चना करने से धन, धान्य, आरोग्य और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। खासतौर पर संतान प्राप्ति और संतान की दीर्घायु की कामना को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं लक्ष्मी कुंड पहुंचती हैं।

श्रद्धालु महिलाएं 16 दिनों तक नियम और संयम का पालन करते हुए लक्ष्मी कुंड में पूजा-अर्चना और अर्घ्य देती हैं। सोरहिया मेले में वाराणसी के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

लक्ष्मी कुंड की सफाई और सजावट तेज

मेले को देखते हुए लक्ष्मी कुंड परिसर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कुंड की वृहद स्तर पर साफ-सफाई कराई जा रही है। इसके साथ ही आसपास के मार्गों और कुंड क्षेत्र को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है, ताकि मेले के दौरान पूरा इलाका रोशनी से जगमगाता रहे।

लक्ष्मी मंदिर में भी रंगाई-पुताई और सजावट का काम चल रहा है। मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित किया जा रहा है।

सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और CCTV कैमरे

सोरहिया मेले में आने वाली संभावित भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और नगर निगम ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए लक्ष्मी कुंड के आसपास मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुंड परिसर और आसपास के प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। भीड़ के दौरान आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की निगरानी और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।

जिउतिया व्रत के साथ 3 अक्टूबर को होगा समापन

सोरहिया मेला कुल 16 दिनों तक चलेगा। 18 सितंबर से शुरू होने के बाद इसका समापन 3 अक्टूबर को जीवित्पुत्रिका यानी जिउतिया व्रत के साथ होगा।

सोरहिया मेले की खासियत यह है कि पूरे आयोजन के दौरान लक्ष्मी कुंड श्रद्धालुओं की धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहता है। संतान की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा की कामना से महिलाएं यहां पूजा-अर्चना करती हैं।

काशी की धार्मिक परंपराओं में अपनी अलग पहचान रखने वाले इस मेले को लेकर अब लक्ष्मी कुंड परिसर में तैयारियां अंतिम चरण की ओर बढ़ रही हैं। मेले के दौरान भीड़ बढ़ने के साथ प्रशासन की चुनौती श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की भी होगी।