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वाराणसी में UPI पर MDR चार्ज के विरोध में सपा व्यापार सभा का प्रदर्शन, केंद्र सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

वाराणसी में यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.04 प्रतिशत MDR चार्ज के विरोध में समाजवादी व्यापार सभा ने मैदागिन, चौक समेत प्रमुख बाजारों में प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने थाली-चम्मच बजाकर विरोध जताया और केंद्र सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। फैसला वापस नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई।
 

वाराणसी। यूपीआई (UPI) भुगतान पर प्रस्तावित 0.04 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज के विरोध में समाजवादी व्यापार सभा ने सोमवार को वाराणसी के प्रमुख बाजारों में प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष आलोक गुप्ता और महानगर अध्यक्ष काशी नाथ गुप्ता के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मैदागिन, बुलानाला, नीचीबाग, ठठेरी बाजार और चौक में थाली-चम्मच बजाकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करने की मांग की।

छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की जताई आशंका

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं। समाजवादी व्यापार सभा के नेताओं ने कहा कि यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी कारोबारियों और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। उनका कहना था कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आम लोगों और कारोबारियों के लिए सरल एवं किफायती बनाए रखना जरूरी है।

फैसला वापस लेने की मांग, प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाजवादी व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल ने कहा कि केंद्र सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान से व्यापारियों को सुविधा मिली है, इसलिए इससे जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों के साथ संवाद किया जाना चाहिए। प्रदीप जायसवाल ने चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित शुल्क का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।

कई बाजारों के व्यापारी प्रदर्शन में शामिल

प्रदर्शन में सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष पारस नाथ जायसवाल, प्रदेश सचिव डॉ. अजय चौरसिया, जिला महासचिव प्रदीप मोदनवाल और महानगर महासचिव सोहन लाल चौरसिया समेत बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी आपत्ति जताई और सरकार से व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की।