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वाराणसी के तालाबों, कुंडों और कुओं का होगा कायाकल्प, ₹58 करोड़ के CSR प्रोजेक्ट के लिए PFC ने किया MoU
 

 

वाराणसी। काशी की ऐतिहासिक जल धरोहरों को संरक्षित और पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC) ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत वाराणसी के तालाबों, कुंडों और सामुदायिक कुओं के कायाकल्प के लिए ₹58 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी है। इस संबंध में महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

MoU हस्ताक्षर कार्यक्रम का आयोजन रुद्राक्ष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में किया गया। कार्यक्रम में वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, PFC की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक परमिंदर चोपड़ा और नगर आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी के सीईओ हिमांशु नागपाल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि काशी की आत्मा उसके प्राचीन तालाबों, कुंडों और कुओं में बसती है। इन जल स्रोतों का जीर्णोद्धार पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वाराणसी की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगा। उन्होंने इस परियोजना के लिए PFC का आभार जताते हुए कहा कि यह काशीवासियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण पहल है।

PFC की CMD परमिंदर चोपड़ा ने कहा कि कंपनी देश के बुनियादी ढांचे के विकास के साथ पर्यावरण और सामुदायिक कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ₹58 करोड़ की CSR परियोजना को आधुनिक मानकों के अनुरूप तय समय सीमा में पूरा किया जाएगा। इससे वाराणसी के भूजल स्तर और स्थानीय पर्यावरण में सुधार की उम्मीद है।

नगर आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी के सीईओ हिमांशु नागपाल ने बताया कि परियोजना का क्रियान्वयन व्यवस्थित और आधुनिक तरीके से किया जाएगा। तालाबों और कुंडों के सौंदर्यीकरण के साथ पानी को प्राकृतिक रूप से स्वच्छ रखने के लिए ईको-फ्रेंडली तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, सामुदायिक कुओं के जीर्णोद्धार से स्थानीय लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

परियोजना के तहत सारनाथ स्थित तालाब का पर्यावरणीय पुनर्विकास किया जाएगा। इसके अलावा कंदवा, संदाहा, रेवागीर, सारंगनाथ, पुलिस लाइन और पांडेयपुर समेत 25 तालाबों की डिसिल्टिंग और डिसलजिंग होगी। रानीपोखरी, कोनिया बैतरणी कुंड, कुरुक्षेत्र तालाब, सोना तालाब, बाबा जगन्नाथ दास सरोवर और पोंगलपुर समेत 30 कुंडों के साथ 100 सामुदायिक कुओं के जीर्णोद्धार और जल शोधन का कार्य भी प्रस्तावित है।

कार्यक्रम के अंत में गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में MoU की प्रतियों का आदान-प्रदान किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना काशी की पारंपरिक जल धरोहर और आधुनिक सतत विकास के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु साबित होगी।