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विश्व धरोहर बनने के बाद सारनाथ में क्या-क्या बदलेगा? केंद्रीय मंत्री शेखावत ने अधिकारियों संग बनाया विकास का रोडमैप

 

वाराणसी। विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद सारनाथ में संरक्षण और विकास कार्यों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विश्व धरोहर स्थल सारनाथ का भ्रमण किया। इस दौरान उनके साथ यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत विशाल वी. शर्मा भी मौजूद रहे।

सारनाथ में आयोजित समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, प्रभागीय वन अधिकारी निधि चौहान, एएसआई के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अरुण राज टी., एसडीएम सदर नितिन सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. बीरी सिंह तथा पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद पहली यात्रा

राजदूत विशाल वी. शर्मा हाल ही में दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की बैठक में सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनने के बाद सीधे सारनाथ पहुंचे। यहां से वह फ्रांस के पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय के लिए रवाना होंगे। उनकी यह यात्रा इस ऐतिहासिक उपलब्धि के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

ढाई हजार वर्षों से अधिक पुरानी विरासत

सारनाथ केवल भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश का स्थल ही नहीं, बल्कि 2,500 वर्षों से अधिक समय से आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का केंद्र रहा है। इतिहास में इसे सारंगनाथ, ऋषिपत्तन, इसिपत्तन और मृगदाव (डियर पार्क) जैसे नामों से भी जाना जाता है।

बुसान में आयोजित यूनेस्को बैठक के दौरान राजदूत विशाल वी. शर्मा ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और उत्तर प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया था। सारनाथ अब उत्तर प्रदेश की चौथी और भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति बन चुका है।

यूनेस्को मानकों के अनुरूप होगा संरक्षण

बैठक में राजदूत शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि सारनाथ के संरक्षण, प्रबंधन और विकास से जुड़े सभी कार्य यूनेस्को विश्व धरोहर संधि के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किए जाएं। उन्होंने कहा कि विश्व धरोहर का दर्जा केवल सम्मान नहीं, बल्कि इस विरासत को सुरक्षित रखने की बड़ी जिम्मेदारी भी है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने भी अधिकारियों से ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण, पर्यटकों की सुविधाओं के विस्तार और सारनाथ की वैश्विक पहचान को और मजबूत बनाने की दिशा में समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।