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जहां इलाज मिलने की उम्मीद थी, वहां पानी से जूझते दिखे मरीज...BHU अस्पताल हुआ जलमग्न, कमर तक लगा पानी

 

वाराणसी। पूर्वांचल की स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र माने जाने वाले काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल में मंगलवार को लगातार बारिश के बाद जलभराव ने मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ा दी। करीब 12 घंटे तक हुई बारिश थमने के बाद भी अस्पताल परिसर में जगह-जगह पानी जमा रहा। ओपीडी से लेकर जांच काउंटर तक जाने वाले रास्ते पानी में डूबे रहे। हालात ऐसे रहे कि कई मरीज इलाज और जांच कराए बिना ही वापस लौटने को मजबूर हो गए।

सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी में सामान्य दिनों में रोजाना करीब पांच से छह हजार मरीज इलाज और चिकित्सकीय परामर्श के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, बारिश और जलभराव का सीधा असर मरीजों की संख्या पर पड़ा। शनिवार को ओपीडी में एक हजार मरीज भी नहीं पहुंच सके थे। मंगलवार को भी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को जलभराव के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

कमर तक पानी, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर हुए बेअसर

अस्पताल परिसर में कई जगह पानी इतना भर गया कि व्हीलचेयर और स्ट्रेचर से मरीजों को ले जाना भी मुश्किल हो गया। बुजुर्ग, दिव्यांग और गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई परिजन अपने मरीजों को गोद में उठाकर पानी के बीच से अस्पताल तक ले जाते नजर आए।

ओपीडी की पर्ची बनवाने के लिए मरीजों और तीमारदारों को करीब 150 मीटर तक पानी से होकर गुजरना पड़ा। फिसलने के खतरे के बीच लोग किसी तरह काउंटर तक पहुंचे। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह का जलभराव मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।

डॉक्टर को दिखाने के बाद भी खत्म नहीं हुई परेशानी

ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद मरीजों की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गईं। ब्लड जांच के लिए सीसीआई लैब तक पहुंचने के लिए करीब 100 मीटर तक पानी भरे रास्ते से गुजरना पड़ा। बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह दूरी तय करना काफी कठिन रहा। जिन मरीजों को जांच के बाद दोबारा डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत थी, उन्हें भी पानी से भरे रास्ते से कई बार आना-जाना पड़ा। इससे मरीजों के साथ उनके परिजन भी परेशान नजर आए।

बाल रोग, ईएनटी और नेत्र विभाग तक पहुंचना मुश्किल

जलभराव का सबसे ज्यादा असर बाल रोग, ईएनटी और नेत्र रोग विभाग की ओर जाने वाले रास्तों पर देखने को मिला। इन विभागों तक जाने वाले रास्तों पर पानी जमा होने से मरीजों को काफी परेशानी हुई।

बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे अभिभावकों ने उन्हें पानी से बचाने के लिए गोद में उठाकर रास्ता पार कराया। वहीं, नेत्र और ईएनटी विभाग में आने वाले बुजुर्ग मरीजों के लिए पानी के बीच चलकर विभाग तक पहुंचना बेहद मुश्किल रहा। गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर से ले जाने में भी परेशानी सामने आई।

जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

सर सुंदरलाल अस्पताल सिर्फ वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल और आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र है। यहां रोजाना हजारों लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बारिश के बाद अस्पताल परिसर में इस तरह का जलभराव स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल परिसर में जलनिकासी की स्थायी और प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है। बारिश के दौरान यदि अस्पताल के मुख्य रास्ते ही पानी में डूब जाएं तो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज दिलाना मुश्किल हो सकता है।

मंगलवार को जलभराव ने एक बार फिर अस्पताल की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोगों को बारिश के मौसम में इस तरह की परेशानी से निजात दिलाने के लिए स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।