{"vars":{"id": "130921:5012"}}

127 किलो गांजा, फर्जी बिल्टी और अंतरराज्यीय नेटवर्क- वाराणसी में साड़ी के पैकेट में छिपाकर हो रहा था ड्रग्स सप्लाई, 1 आरोपी गिरफ्तार 

वाराणसी में STF और NCB ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रोहनिया स्थित कूरियर गोदाम से 127 किलो गांजा बरामद किया। असम से सिल्क साड़ी की बिल्टी में छिपाकर लाई गई खेप को जब्त करते हुए एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया। अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क की जांच जारी है।

 

वाराणसी: नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत रविवार को एक बड़ी कार्रवाई सामने आई। उत्तर प्रदेश एसटीएफ (वाराणसी यूनिट) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) गोरखपुर की संयुक्त टीम ने रोहनिया क्षेत्र में छापेमारी कर गांजा तस्करों के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान कूरियर गोदाम से 127 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया, जिसे असम से सिल्क साड़ी की आड़ में वाराणसी भेजा गया था।

सिल्क साड़ी के पैकेटों में छिपाकर भेजी गई थी गांजे की खेप

जानकारी के अनुसार, एसटीएफ को इनपुट मिला था कि असम से बड़ी मात्रा में गांजा मंगाकर वाराणसी समेत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में सप्लाई किया जा रहा है। सूचना के आधार पर एसटीएफ और एनसीबी की टीम ने रविवार दोपहर रोहनिया के परमानंदपुर स्थित टीसीआई एक्सप्रेस कूरियर सर्विस के गोदाम पर छापेमारी की।

जांच के दौरान सिल्क साड़ी की बिल्टी वाले 24 पैकेट संदिग्ध पाए गए। जब इन पैकेटों की तलाशी ली गई तो उनमें छिपाकर रखा गया कुल 127 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। प्रत्येक पैकेट में औसतन पांच किलोग्राम से अधिक गांजा रखा गया था।

आजमगढ़ का तस्कर गिरफ्तार

कार्रवाई के दौरान आजमगढ़ जिले के जहानागंज थाना क्षेत्र के काजीपुर गांव निवासी प्रेमचंद्र मौर्य को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने कई अहम खुलासे किए हैं। आरोपी ने बताया कि यह खेप असम से मंगाई गई थी और उसे पूर्वांचल के विभिन्न छोटे-बड़े कारोबारियों तक पहुंचाया जाना था।

असम से संचालित हो रहा था नेटवर्क

एसटीएफ के एएसपी विनोद सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि असम के उदालगुड़ी जिले का निवासी बबरू वर्मन गांजे की आपूर्ति करता था। इसके बाद गुवाहाटी निवासी बबलू नामक व्यक्ति नेटवर्क के जरिए माल को वाराणसी भेजता था।

जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि कूरियर सर्विस के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से गांजे की खेप को सामान्य पार्सल की तरह भेजा जाता था, जिससे संदेह न हो सके।

सात बार पहले भी मंगाई जा चुकी थी खेप

एनसीबी की शुरुआती जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी प्रेमचंद्र मौर्य इससे पहले कम से कम सात बार गांजे की खेप मंगाकर बाजार में खपा चुका है। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन, सप्लाई चेन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

पूरे गिरोह की तलाश में जुटीं एजेंसियां

एनसीबी ने एनडीपीएस एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही पूरे अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने का काम शुरू कर दिया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं।

कार्रवाई में एसटीएफ के निरीक्षक अनिल कुमार, हरिनारायण पटेल समेत अन्य अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।