कफ सिरप तस्करी केस: सरगना शुभम जायसवाल की दो शराब दुकानों के लाइसेंस रद्द, 6 दुकानें सील
वाराणसी के चर्चित कफ सिरप तस्करी मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए आबकारी विभाग ने दो शराब दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए। नई लॉटरी प्रक्रिया में नए लाइसेंसधारकों का चयन हुआ। मामले में हवाला कनेक्शन और दुबई लिंक की जांच जारी है, जबकि चार अन्य दुकानों पर फैसला लंबित है।
वाराणसी: कफ सिरप तस्करी मामले का असर अब शराब कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए आबकारी विभाग ने शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली और उससे जुड़े नेटवर्क की लाइसेंसी रेखा देवी की शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं।
इन दोनों दुकानों के लिए नई लॉटरी प्रक्रिया के तहत कोटवा निवासी देवेंद्र सिंह और नवापुरा की रेखा यादव को लाइसेंस आवंटित किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया से आबकारी विभाग को 5 करोड़ 27 लाख रुपये से अधिक की राजस्व प्राप्ति हुई है।
हवाला कनेक्शन और दुबई लिंक ने खोली परतें
जांच में सामने आया कि कफ सिरप तस्करी के इस बड़े नेटवर्क में शराब दुकानों की कमाई का एक हिस्सा हवाला के जरिए दुबई में छिपे मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल तक पहुंचाया जा रहा था।
पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़ा एक लिखित समझौता भी मिला, जिसमें स्पष्ट तौर पर तय किया गया था कि शराब की कमाई का हिस्सा नियमित रूप से भेजा जाएगा।
6 दुकानों पर पड़ी थी छापेमारी, कई सील
12 अप्रैल को आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने कई जगहों पर छापेमारी की थी। इस दौरान लहरतारा, शाहाबाद, परेड कोठी, माधोपुर, कज्जाकपुरा और खोजवां स्थित कुल 6 कंपोजिट शराब दुकानों को सील किया गया था। इन दुकानों से जुड़े लाइसेंसियों में शिवांगी जायसवाल, रेखा देवी, बबिता सिंह, वैशाली, ऊषा देवी और राधिका जायसवाल के नाम सामने आए थे।
चार दुकानों का मामला अभी लंबित
जिला आबकारी अधिकारी कमल किशोर शुक्ल के मुताबिक, इस प्रकरण से जुड़ी चार अन्य शराब दुकानों का मामला अभी जिलाधिकारी के समक्ष विचाराधीन है। इन दुकानों के बंद रहने से विभाग को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
812 लोगों ने भरी थी दावेदारी, लॉटरी से तय हुए नए लाइसेंसधारक
दोनों रद्द लाइसेंसों के लिए कुल 812 लोगों ने आवेदन किया था। पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लॉटरी निकाली गई, जिसमें देवेंद्र सिंह और रेखा यादव का चयन हुआ। यह प्रक्रिया प्रशासन की सख्ती और पारदर्शिता का संकेत मानी जा रही है।
लाइसेंस लेने से पहले देना होता है शपथपत्र
एसीपी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि शराब दुकान का लाइसेंस लेने से पहले सभी आवेदकों को शपथपत्र देना होता है। इसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि अगर किसी भी तरह से संगठित अपराध या माफिया कनेक्शन सामने आता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।