{"vars":{"id": "130921:5012"}}

50 हजार लगाओ, हर हफ्ते कमाओ… पीएम को ड्रीम प्रोजेक्ट के नाम पर 2600 करोड़ की ठगी

गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर देशभर में 2600 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। नैक्सा एवरग्रीन कंपनी ने इसे सरकारी योजना बताकर निवेशकों को झांसे में लिया। हरियाणा में एफआईआर दर्ज हुई थी, पुलिस जांच में पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।

 

गुजरात के धोलेरा क्षेत्र में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर देशभर में हजारों निवेशकों को ठगने का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस तथाकथित प्रोजेक्ट के जरिए करीब 2600 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।

सरकारी प्रोजेक्ट बताकर निवेशकों को फंसाया गया

आरोप है कि बीकानेर स्थित नैक्सा एवरग्रीन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट और बड़े उद्योगपतियों से जुड़ा बताकर लोगों का भरोसा जीता। निवेशकों को यकीन दिलाया गया कि यह एक सरकारी योजना है, जिसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित और लाभकारी है।

लुभावने ऑफर से किया गया बड़ा फर्जीवाड़ा

कंपनी ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बेहद लुभावनी स्कीम पेश की। इसके तहत 50 हजार रुपये निवेश करने पर हर सप्ताह 1353 रुपये रिटर्न देने और 60 सप्ताह में 81,180 रुपये तक कमाने का दावा किया गया। इसी लालच में आकर देशभर के लोगों ने भारी निवेश कर दिया।

हरियाणा में दर्ज हुई थी पहली एफआईआर

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब हरियाणा के नारनौल जिले के कनीना सदर थाने में तीन वर्ष पहले शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता अजीत सिंह ने आरोप लगाया कि कंपनी ने फर्जी दावे कर लोगों से पैसे जुटाए।

जांच में सामने आया- कोई सरकारी प्रोजेक्ट ही नहीं था

पुलिस जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर निवेश कराया गया, वह किसी भी सरकारी योजना का हिस्सा ही नहीं था। यानी पूरी योजना एक सुनियोजित ठगी का जाल थी।

कंपनी के कई संचालक आरोपी, कुछ गिरफ्तार

इस मामले में नैक्सा एवरग्रीन प्राइवेट लिमिटेड के एमडी रणबीर बिजनोरिया, सीएमडी सुभाष विजनोरिया और आईटी एक्सपर्ट सुधीश मोल सहित कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक को जमानत मिल गई है।

पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में पेश किया चालान

पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच पूरी कर ली है और आरोप पत्र जिला न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है। जांच एजेंसियां अब इस ठगी में शामिल अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

निवेशकों के लिए चेतावनी बनकर सामने आया मामला

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि बड़े नामों और सरकारी प्रोजेक्ट के नाम पर किए जा रहे निवेश दावों की पूरी जांच जरूरी है। बिना सत्यापन के निवेश करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।