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सिर्फ बैंक अकाउंट देकर बन गए करोड़ों की ठगी के पार्टनर! 6 म्यूल अकाउंट होल्डर्स पर FIR, 2.42 करोड़ की ठगी का खुलासा
 

वाराणसी पुलिस के ‘ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक’ में 2.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े 6 म्यूल खाताधारकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एनसीआरपी पोर्टल पर इन खातों से जुड़ी 51 शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस अब 32 अन्य संदिग्ध खातों की भी जांच कर रही है।

 

वाराणसी: साइबर अपराधियों के खिलाफ कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक’ के तहत 2.42 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी से जुड़े 6 म्यूल खाताधारकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साइबर क्राइम सेल और संबंधित थानों की संयुक्त कार्रवाई में कुल 5 म्यूल खातों की पहचान की गई, जिनसे जुड़े मामलों में एनसीआरपी पोर्टल पर 51 शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस अब इन खातों से जुड़े 32 अन्य संदिग्ध बैंक खातों की भी जांच कर रही है।

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध आलोक प्रियदर्शी के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर क्राइम सेल कमिश्नरेट वाराणसी तथा थाना साइबर सेल की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। अभियान का नेतृत्व सहायक पुलिस आयुक्त साइबर क्राइम विदुष सक्सेना के नेतृत्व में किया गया।

चार थानों में दर्ज हुए मुकदमे

ऑपरेशन के तहत थाना भेलूपुर, सिगरा, चेतगंज और चोलापुर क्षेत्र में कुल चार मुकदमे दर्ज कर छह आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की गई है।

सबसे बड़ा मामला भेलूपुर से

भेलूपुर थाना क्षेत्र के बजरडीहा निवासी मोहम्मद उनैश के खाते से जुड़ी 43 शिकायतें एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज मिलीं। जांच में सामने आया कि इस खाते के माध्यम से करीब 2 करोड़ 19 लाख 27 हजार 152 रुपये की साइबर ठगी की गई थी। इस खाते में लगभग 2 करोड़ 3 लाख 30 हजार रुपये की होल्ड राशि भी चिन्हित की गई।

अन्य मामलों में भी लाखों की ठगी

सिगरा थाना क्षेत्र के हरदत्तपुर निवासी अजीत कुमार पटेल के खाते से जुड़े मामले में करीब 22 लाख रुपये के फ्रॉड की जानकारी सामने आई है, जबकि खाते में लगभग 6 लाख रुपये की राशि होल्ड की गई। चेतगंज थाना क्षेत्र के नक्की घाट निवासी आरिफ जमाल के खिलाफ भी साइबर फ्रॉड से संबंधित मामला दर्ज किया गया है।

चोलापुर थाना क्षेत्र में श्रीशीष कुमार गौड़, सिखथम यादव और शुभम सिंह के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया। जांच में सामने आया कि इनमें से कुछ खातों का उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा धनराशि ट्रांसफर और छिपाने के लिए किया जा रहा था।


म्यूल अकाउंट क्या होता है?

म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग साइबर अपराधी ऑनलाइन ठगी से प्राप्त धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने, छिपाने या निकालने के लिए करते हैं। कई बार खाताधारक लालच, कमीशन, नौकरी के झांसे या अन्य माध्यमों से अनजाने में अपने खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं।

साइबर अपराधी कैसे करते हैं इस्तेमाल?

साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, निवेश धोखाधड़ी, ऑनलाइन जॉब ऑफर, लॉटरी और अन्य साइबर ठगी के जरिए लोगों से पैसे ऐंठते हैं। इसके बाद सीधे अपने खाते में पैसा लेने के बजाय म्यूल खातों में धनराशि ट्रांसफर कराते हैं। रकम को कई खातों में घुमाने के बाद एटीएम, यूपीआई, क्रिप्टोकरेंसी या अन्य माध्यमों से निकाल लिया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

32 अन्य खातों की भी जांच जारी

पुलिस के अनुसार जिन खातों पर कार्रवाई की गई है, उनसे जुड़े कुल 32 अन्य बैंक खातों की जांच अभी जारी है। साइबर क्राइम सेल इन खातों के माध्यम से हुए लेनदेन और संभावित नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग सुविधा किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें, वरना वे भी साइबर अपराध के मामलों में कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

क्या है 'ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक'?

साइबर अपराधों में बढ़ती घटनाओं को देखते हुए गृह मंत्रालय के 14C और एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से ऐसे संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई जाती है, जिनका उपयोग साइबर ठग अवैध धनराशि के लेनदेन में करते हैं। कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने ऐसे खाताधारकों और साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष अभियान शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक’ नाम दिया गया।