5 लाख फर्जी ईमेल ID, 5 देशों तक नेटवर्क और वाराणसी में साथी! ATS की जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे
कानपुर में पांच लाख फर्जी ईमेल आईडी बनाने के आरोपित अंकित शंखवार से पूछताछ में वाराणसी तक फैले नेटवर्क का पता चला है। ATS के रडार पर करीब 12 लोग हैं। जांच में VPN, टेंप मेल, विदेशी पहचान और टू-स्टेप वेरिफिकेशन को चकमा देने के तरीकों की जानकारी सामने आई है।
कानपुर में पांच लाख फर्जी ईमेल आईडी बनाकर उन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किए, अमेरिका समेत पांच देशों में बैठे कथित देश विरोधी तत्वों को बेचने के आरोपित अंकित शंखवार से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अंकित ने ईमेल अकाउंट के दुरुपयोग को रोकने के लिए विकसित टू-स्टेप वेरिफिकेशन प्रणाली को भी चकमा देने का तरीका निकाल लिया था। वह निष्क्रिय ईमेल आईडी को दोबारा सक्रिय करने में भी सक्षम था। जांच में उसका एक करीबी साथी वाराणसी में होने की जानकारी मिली है, जिसे पुलिस ने चिह्नित कर लिया है।
एटीएस और अन्य जांच एजेंसियां अब अंकित के नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका खंगाल रही हैं। उसके संपर्क में रहे छह युवकों से पूछताछ की जा रही है। इनसे दो नए नाम सामने आए हैं। अब तक करीब 12 लोग जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कानपुर के आसपास के जिलों में भी उसका नेटवर्क सक्रिय है। एटीएस अब अंकित को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है।
वाराणसी में मिला अंकित का करीबी, 12 लोग जांच के घेरे में
अंकित शंखवार को एटीएस ने 28 अक्टूबर को कानपुर के देहली सुजानपुर से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसके नेटवर्क और फर्जी ईमेल आईडी तैयार करने के तरीकों से जुड़ी कई जानकारियां सामने आईं। जांच एजेंसियों को पता चला है कि उसका एक विश्वसनीय साथी वाराणसी में मौजूद है। पुलिस ने उसकी पहचान कर ली है।
अंकित के संपर्क में रहे छह युवकों से भी पूछताछ की जा रही है। इनके बयान और जानकारी के आधार पर दो अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। इस तरह अब तक करीब 12 लोग एटीएस की जांच के दायरे में आ चुके हैं। एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कानपुर के आसपास के किन जिलों में उसका नेटवर्क सक्रिय था और फर्जी ईमेल आईडी तैयार करने तथा बेचने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
VPN और प्रॉक्सी सेटिंग से बदलता था डिजिटल लोकेशन
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अंकित वाई-फाई राउटर में ओपन VPN और SOCKS5 जैसी सेटिंग का इस्तेमाल कर IP एड्रेस बदल लेता था। इससे राउटर से जुड़े डिवाइस की डिजिटल लोकेशन किसी दूसरे देश की दिखाई दे सकती थी। इस तरीके से वह अपनी इंटरनेट गतिविधियों की वास्तविक लोकेशन छिपाने की कोशिश करता था।
इसके अलावा वह इंटरनेट पर उपलब्ध टेंप मेल और 10 मिनट मेल जैसी वेबसाइटों का इस्तेमाल करता था। ये सेवाएं बिना व्यक्तिगत जानकारी या मोबाइल नंबर मांगे सीमित समय के लिए ईमेल आईडी उपलब्ध कराती हैं। इनका इस्तेमाल OTP प्राप्त करने और वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए किया जा सकता है।
ProtonMail और Tuta जैसी सेवाओं का भी करता था इस्तेमाल
पूछताछ में सामने आया है कि अंकित ProtonMail और Tuta (पहले Tutanota) जैसी ईमेल सेवाओं का भी इस्तेमाल करता था। इन सेवाओं में अकाउंट बनाते समय फोन नंबर या वास्तविक नाम देना हमेशा जरूरी नहीं होता और इनमें ईमेल डेटा को एन्क्रिप्ट करने की सुविधा मिलती है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन अलग-अलग तरीकों को मिलाकर अंकित ईमेल प्रदाता कंपनियों की टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने की कोशिश करता था। इसी के सहारे वह निष्क्रिय ईमेल आईडी को दोबारा सक्रिय करने में भी कामयाब हो रहा था।
क्रिप्टो लेनदेन के लिए विदेशी पहचान का इस्तेमाल
जांच में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन का पहलू भी सामने आया है। भारत में क्रिप्टो वॉलेट बनाने और एक्सचेंज पर लेनदेन करने के लिए पहचान तथा KYC प्रक्रिया जरूरी होती है। ऐसे में अंकित ने विदेशी नाम और पहचान का इस्तेमाल किया था।
एटीएस और अन्य जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी ईमेल आईडी की बिक्री से जुड़े नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे, विदेशी पहचान का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इस पूरे मामले में वाराणसी समेत आसपास के जिलों में सक्रिय लोगों की क्या भूमिका रही। अंकित को रिमांड पर लेकर पूछताछ के बाद नेटवर्क के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।