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ED की सख्ती रंग लाई, साइबर फ्रॉड आरोपी भूपेश अरोड़ा की जमानत याचिका खारिज

 

New Delhi : दिल्ली की स्पेशल PMLA कोर्ट ने शनिवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साइबर इन्वेस्टमेंट फ्रॉड मामले के मुख्य आरोपी भूपेश अरोड़ा की जमानत याचिका खारिज कर दी। अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 11 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था।

अरोड़ा पर आरोप है कि वह 2022 की शुरुआत में अपने साथियों के साथ दुबई भाग गया था, ताकि भारत में चल रही जांच से बच सके। हाल ही में वह नेपाल सीमा के जरिए गुप्त तरीके से देश लौटा, जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

ED की जांच के अनुसार, Xindai Technologies Pvt. Ltd., भूपेश अरोड़ा, रोहित विज और अन्य ने मिलकर LOXAM नामक इन्वेस्टमेंट ऐप के जरिए हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की।

  • इस ऐप को एक बड़ी फ्रेंच कंपनी का हिस्सा बताकर भारी रिटर्न का लालच दिया गया।
  • लोगों से जमा कराई गई रकम को विदेश भेज दिया गया।
  • जुलाई 2022 में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने FIR दर्ज की, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस खोला।
  • अब तक की कार्रवाई में पांच ठिकानों पर छापेमारी की गई, डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए और 2.01 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई।

जांच में सामने आया कि 500 से ज्यादा बैंक खातों के जरिए करीब 311 करोड़ रुपये को घुमाया गया।

  • यह पैसा Xindai Technologies Pvt. Ltd. और उससे जुड़े खातों से होकर Ranjan Moneycorp Pvt. Ltd. और KDS Forex Pvt. Ltd. में ट्रांसफर हुआ।
  • बाद में इस रकम को फॉरेन करेंसी में बदलकर हवाला नेटवर्क से विदेश भेजा गया।
  • इसके अलावा करीब 903 करोड़ रुपये का फर्जी विदेशी लेन-देन पेमेंट गेटवे और शेल कंपनियों के जरिए हुआ।

ED का कहना है कि यह पूरा पैटर्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसी FATF (Financial Action Task Force) द्वारा चिन्हित मनी लॉन्ड्रिंग तकनीकों से मेल खाता है।

जांच में मिले दस्तावेजों और गवाहियों से साबित हुआ कि भूपेश अरोड़ा ही इस पूरे नेटवर्क का मुख्य साजिशकर्ता था।

  • उसने कैश विदड्रॉल, फॉरेक्स कन्वर्जन और हवाला चैनल तैयार किए।
  • कई मनी चेंजर और बिचौलियों को साथ मिलाकर पैसों को विदेश भेजने का सिस्टम बनाया।

कोर्ट ने माना कि आरोपी के खिलाफ गंभीर सबूत हैं और उसे जमानत देना जांच और गवाहों पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इसलिए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।