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कफ सिरप केस में हवाला से पैसा घुमाने वाला मास्टरमाइंड वैभव जायसवाल गिरफ्तार, 10 रुपये के नोट से चलता था पूरा नेटवर्क

वाराणसी के 2000 करोड़ रुपये के कफ सिरप तस्करी मामले में SIT ने हवाला नेटवर्क संभालने वाले मुख्य आरोपी वैभव जायसवाल को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में रोजाना 50 करोड़ के लेनदेन और 10 रुपये के नोट से भुगतान का बड़ा खुलासा हुआ है।

 

वाराणसी: करीब 2000 करोड़ रुपये के कफ सिरप तस्करी मामले में पुलिस कमिश्नरेट की विशेष जांच टीम (SIT) को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने हवाला नेटवर्क के जरिए तस्करी की रकम को इधर-उधर पहुंचाने वाले मुख्य आरोपी वैभव जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। वह गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है।
 

रोजाना 50 करोड़ रुपये का होता था लेनदेन

पूछताछ में वैभव जायसवाल ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि यह गिरोह रोजाना करीब 50 करोड़ रुपये का लेनदेन करता था। उसका मुख्य काम कफ सिरप तस्करी से अर्जित रकम को हवाला के माध्यम से अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाना था।
 

10 रुपये के नोट से करोड़ों का ट्रांजैक्शन

इस रैकेट का सबसे हैरान करने वाला तरीका सामने आया है। गिरोह 10 रुपये के नोट के जरिए करोड़ों रुपये का भुगतान करता था। जिस व्यक्ति को पैसा लेना होता, उसे एक खास नंबर वाला 10 रुपये का नोट दिया जाता। उसी नोट की फोटो व्हाट्सएप के जरिए भेजी जाती और मिलान होते ही करोड़ों का लेनदेन पूरा मान लिया जाता था।
 

पहले भी कई आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क का विस्तार बड़ा

इस मामले में SIT पहले ही प्रशांत पाठक, मनोज यादव और उसके बेटे लक्ष्य यादव सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा गिरोह से जुड़े कई अपराधियों को नेपाल सीमा से भी पकड़ा गया है।
 

जिम के नीचे मिला था बड़ा स्टॉक

जांच के दौरान रोहनिया के भदवर इलाके में एक जिम के नीचे बने गोदाम से पुलिस ने 500 पेटी कोडीनयुक्त कफ सिरप बरामद किया था। इसी कड़ी में गाजियाबाद निवासी सौरभ त्यागी और शिवाकांत उर्फ शिवा का नाम सामने आया।
 

त्रिपुरा जेल में होगी पूछताछ

सौरभ त्यागी फिलहाल त्रिपुरा जेल में बंद है। वाराणसी पुलिस जल्द ही वहां जाकर उससे पूछताछ करेगी। चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस इस नेटवर्क के हर लिंक को जोड़ने में जुटी है। वैभव जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद SIT को उम्मीद है कि इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के कई बड़े राज जल्द सामने आएंगे। जांच एजेंसियां अब हवाला चैनल और जुड़े अन्य सहयोगियों पर शिकंजा कस रही हैं।