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न मैसेज आया, न ई-मेल… फिर खातों से निकल गए 18 लाख, 30 संदिग्ध ट्रांजेक्शन और स्टेटमेंट से खुला राज

वाराणसी में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रथयात्रा निवासी माणिक लाल गुजराती के तीन बैंक खातों से करीब 18 लाख रुपये निकाल लिए गए। 13 फरवरी से 25 मार्च के बीच करीब 30 संदिग्ध लेनदेन हुए, लेकिन पीड़ित को कोई SMS या ई-मेल अलर्ट नहीं मिला।
 

वाराणसी: शहर में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रथयात्रा निवासी माणिक लाल गुजराती के तीन अलग-अलग बैंक खातों से साइबर जालसाजों ने करीब 18 लाख रुपये निकाल लिए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रकम निकाले जाने के दौरान पीड़ित को न तो कोई SMS अलर्ट मिला और न ही ई-मेल के जरिए लेनदेन की जानकारी दी गई। बैंक स्टेटमेंट निकलवाने के बाद उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला।

पीड़ित ने साइबर क्राइम सेल में शिकायत देकर मामले की जानकारी दी है। शिकायत के अनुसार, 13 फरवरी से 25 मार्च के बीच उनके बैंक खातों में करीब 30 संदिग्ध लेनदेन हुए। इन ट्रांजेक्शन के जरिए अलग-अलग खातों से रकम निकाली गई।

तीन बैंक खातों से निकाली गई रकम

माणिक लाल गुजराती के मुताबिक, उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बचत खाते से करीब 13 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक के खाते से करीब दो लाख रुपये और एचडीएफसी बैंक के चालू खाते से लगभग तीन लाख रुपये निकाल लिए गए। इस तरह तीनों खातों से कुल करीब 18 लाख रुपये की रकम संदिग्ध लेनदेन के जरिए निकाली गई।

बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर सामने आया मामला

पीड़ित के अनुसार, उन्हें इन लेनदेन की कोई तत्काल सूचना नहीं मिली। न मोबाइल पर मैसेज आया और न ही ई-मेल के जरिए किसी ट्रांजेक्शन की जानकारी दी गई। बाद में जब उन्होंने बैंक स्टेटमेंट निकलवाया तो खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी और साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई।

नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत

धोखाधड़ी की जानकारी मिलने के बाद माणिक लाल ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से साइबर जालसाजों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ठगी गई रकम की बरामदगी की मांग की है।

मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। करीब 30 संदिग्ध लेनदेन की जांच के साथ यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और इस पूरे साइबर फ्रॉड के पीछे कौन लोग शामिल हैं। पुलिस बैंकिंग ट्रांजेक्शन और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।