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Varanasi Cyber Fraud: 2 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 3 सदस्य गिरफ्तार

वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए करीब 2 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और नकदी बरामद की है। मामले की जांच जारी है।
 

वाराणसी: रामनगर पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह म्यूल अकाउंट (दूसरों के बैंक खातों) के जरिए देशभर में साइबर ठगी की रकम का लेनदेन करता था। शुरुआती जांच में करीब दो करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है।

पुलिस मुख्यालय से मिले इनपुट के बाद खुला मामला

सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विजय प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस मुख्यालय से प्राप्त संदिग्ध म्यूल अकाउंट की सूची के सत्यापन के दौरान रामनगर क्षेत्र के एक बैंक खाते में साइबर ठगी से जुड़ी रकम का लेनदेन सामने आया। इसके बाद साइबर सेल, सर्विलांस टीम और रामनगर पुलिस ने संयुक्त जांच शुरू की।

तीन राज्यों से जुड़े आरोपी गिरफ्तार

जांच के आधार पर पुलिस ने 19 जुलाई की रात लंका मैदान के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें रामनगर के घुरहानाला भीटी निवासी रोहित मौर्या, महाराष्ट्र के पालघर निवासी धीरेंद्र लाल बहादुर पाल और बिहार के शेखपुरा निवासी सोनू कुमार उर्फ भोली शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड और 24,880 रुपये नकद बरामद किए हैं।

10 हजार रुपये महीने पर किराए पर लिए जाते थे बैंक खाते

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह लोगों के बैंक खाते मासिक तय रकम पर अपने उपयोग के लिए लेता था। खाते खुलवाने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और संबंधित मोबाइल सिम अपने कब्जे में रख लिए जाते थे। साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर की जाती थी और बाद में विभिन्न माध्यमों से निकाल ली जाती थी।

कमीशन के बदले चलता था पूरा नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया कि रोहित मौर्या अपने परिचितों के बैंक खाते 10 हजार रुपये प्रतिमाह पर उपलब्ध कराता था। इसके बाद धीरेंद्र उन खातों को बिहार निवासी सोनू कुमार तक पहुंचाता था और इसके बदले उसे 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था।

सोनू का संपर्क साइबर ठगी करने वाले बड़े नेटवर्क से था। वह म्यूल अकाउंट की जानकारी, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज कूरियर और रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए गिरोह तक पहुंचाता था, जिसके एवज में उसे करीब 30 प्रतिशत कमीशन मिलता था।

देशभर में फैले नेटवर्क की जांच जारी

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने किन-किन राज्यों में साइबर अपराध को अंजाम दिया और अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया। एसीपी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है और साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।