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शिक्षा से सत्ता का एक और प्रयोग

 

 नेता तेरा नीति से ये कैसा नाता,
        तेरा खेल समझ में न आता, 
    युवा ने नीति के परिणीति की गजब तस्वीर देखी नेता हंसता है युवा रोता है
             यूजीसी के नाम पर
         आज शिक्षा कठघरे में है,
             मेहनत और सपने
          नीतियों के नीचे दबे हैं।
                न संवाद हुआ,
           न छात्रों की सुनी गई,
             काग़ज़ी फैसलों में
       जन-आवाज़ कहाँ खो गई?
     क्यों शिक्षा सत्ता की जागीर हो गई,
      जो कभी समाज की  थाती हुआ   
                   करती थी,
       पर नियमों की आड़ में
भेदों की दीवार क्यों खड़ी कर दी गई
     आरक्षण का बोझ बढ़ाकर
      न्याय का दावा किया गया,
        विश्वास की नींव पर क्यों
सवर्णों पर क्यों वार-पर-वार किया गया?
        यह जन-रोष की पुकार है,
           यूजीसी के नाम पर
             शिक्षा से सत्ता का
             एक और प्रयोग है।

✍️ अमित श्रीवास्तव उर्फ - अस्क