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Assam Polygamy Ban : बहुविवाह प्रथा पर पहली बार कब लगा था बैन, जानें क्या कहता है इंडियन पीनल कोड का सेक्शन 494?

 

दुनिया आधुनिक हो चुकी है, लेकिन आज भी कई ऐसी परंपराएं हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। इन्हीं में से एक है बहुविवाह प्रथा, यानी एक व्यक्ति का एक से अधिक विवाह करना। समय के साथ समाज में बहुत बदलाव आए, फिर भी कुछ क्षेत्रों में यह प्रथा देखने को मिलती रही। असम सरकार ने अब इस प्रथा को खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है और बहुविवाह को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने वाला नया कानून लागू कर दिया है, लेकिन क्या आप जानते है कि आखिर बहुविवाह प्रथा क्या है और असम सरकार ने इसे बैन क्यों किया।

क्या है बहुविवाह प्रथा?

भारत में विवाह से जुड़ी कई व्यवस्थाएं हैं, जिनमें बहुविवाह प्रथा भी शामिल है। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति एक से अधिक जीवनसाथी रख सकता है। पुराने समय में यह प्रथा कई समुदायों और क्षेत्रों में प्रचलित थी, लेकिन बदलते समय के साथ इसे गैर-जरूरी और असंगत माना जाने लगा।

देश में कब हुआ था बहुविवाह पर प्रतिबंध?

1955 से पहले भारत में बहुविवाह कानूनी रूप से कई जगहों पर मान्य था। लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम 1955 लागू होने के बाद इस प्रथा को हिंदुओं में पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया गया। इसके बाद भी कुछ समुदायों और क्षेत्रों में यह प्रथा जारी रही। इसी कड़ी में अब असम ने इस प्रथा को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में सख्त कदम उठाया है।

क्या है असम का 'बहुविवाह निषेध विधेयक 2025'?

असम सरकार ने हाल ही में ‘असम बहु विवाह निषेध विधेयक, 2025’ पास किया है। यह कानून राज्य में बहुविवाह को पूरी तरह आपराधिक कृत्य घोषित करता है।

  • भारतीय कानून के तहत हिंदू, ईसाई और पारसी समुदायों में बहुविवाह पहले ही प्रतिबंधित था।

  • नए विधेयक से यह सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होगा।

  • अब असम में किसी भी व्यक्ति को एक से अधिक विवाह करने पर कानूनन सज़ा का प्रावधान होगा।

असम सरकार का यह कदम राज्य में समान नागरिक अधिकारों को बढ़ावा देने और महिलाओं के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।