G-2 बयान देकर क्या ट्रंप ने खुद चीन को सुपरपावर मान लिया? असली मास्टरस्ट्रोक तो Xi Jinping का था!
डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के बाद 200 बोइंग विमानों की बड़ी डील सामने आई है। ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक बताया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक स्तर पर शी जिनपिंग ज्यादा मजबूत नजर आए। जानिए अमेरिका-चीन समझौतों, ताइवान बयान और Boeing डील का पूरा विश्लेषण।
Donald Trump China Visit: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी हाई-प्रोफाइल चीन यात्रा खत्म कर स्वदेश लौट चुके हैं। वापसी के बाद ट्रंप ने इस दौरे को हिस्टॉरिक बताते हुए दावा किया कि चीन ने अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग से 200 विमान खरीदने पर सहमति जताई है। ट्रंप के अनुसार भविष्य में यह संख्या 750 तक पहुंच सकती है।
हालांकि इस दौरे के बाद दुनिया भर में यह बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका को वास्तव में बड़ी आर्थिक जीत मिली है या चीन ने इस यात्रा का इस्तेमाल खुद को अमेरिका के बराबर वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए ज्यादा प्रभावी तरीके से किया।
बोइंग डील को ट्रंप ने बताया गेम चेंजर
ट्रंप ने दावा किया कि बोइंग विमान सौदा अमेरिकी उद्योग, नौकरियों और खासकर कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी राहत साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते से अमेरिकी एविएशन सेक्टर को नई मजबूती मिलेगी और GE Aerospace जैसी कंपनियों को भी फायदा होगा क्योंकि चीन को सैकड़ों विमान इंजन सप्लाई किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, Boeing के लिए चीन का बाजार बेहद अहम रहा है। एक समय कंपनी के नैरोबॉडी विमानों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा चीन को जाता था। लेकिन अमेरिका-चीन तनाव, कोविड महामारी और Boeing 737 MAX हादसों के बाद कंपनी का चीनी बाजार लगभग ठप पड़ गया था।
737 MAX विवाद के बाद टूट गया था Boeing का चीन बाजार
2019 में इंडोनेशिया और इथियोपिया में Boeing 737 MAX विमानों के दो बड़े हादसों में 346 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद चीन दुनिया का पहला देश बना जिसने इन विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी।
हालांकि जनवरी 2023 में चीन ने दोबारा 737 MAX विमानों को मंजूरी दे दी, लेकिन तब तक Boeing की बाजार हिस्सेदारी को बड़ा नुकसान हो चुका था। ऐसे में ट्रंप की चीन यात्रा को कंपनी के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
चीन ने ट्रंप को ‘बराबरी’ के नेता की तरह पेश किया
इस यात्रा का सबसे चर्चित पहलू ट्रंप का वह बयान रहा जिसमें उन्होंने अपनी और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping की मुलाकात को “G-2 Meeting” बताया। ट्रंप ने कहा कि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के नेताओं की मुलाकात थी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान चीन के लिए बड़ी प्रतीकात्मक जीत है। चीन लंबे समय से चाहता रहा है कि दुनिया उसे अमेरिका के बराबर वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्वीकार करे।
अमेरिकी अखबार Washington Post ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि पूरी यात्रा के दौरान चीन ने ऐसा माहौल तैयार किया जिसमें Xi Jinping और Donald Trump बराबरी के नेताओं के रूप में दिखाई दें।
West Asia तनाव और ऊर्जा सुरक्षा पर भी चर्चा
दोनों नेताओं के बीच वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर भी विस्तृत बातचीत हुई। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz को लेकर दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों की जरूरत पर जोर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में अमेरिका और चीन दोनों ही आर्थिक और सामरिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
Taiwan पर ट्रंप के बयान ने बढ़ाई चर्चा
चीन यात्रा के दौरान ट्रंप ने Taiwan मुद्दे पर भी अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि चीन Taiwan को स्वतंत्र देश के रूप में नहीं देखना चाहता, लेकिन जब तक वह राष्ट्रपति हैं, तब तक उन्हें नहीं लगता कि चीन कोई आक्रामक कदम उठाएगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि चीन “शांत रहे” और क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति न बने। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ताइवान पर ट्रंप का अपेक्षाकृत नरम रुख चीन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
क्या ट्रंप सिर्फ बड़े दावे कर रहे हैं?
हालांकि ट्रंप ने यात्रा को ऐतिहासिक करार दिया, लेकिन अब तक चीन की ओर से इन आर्थिक समझौतों को लेकर बहुत विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। Boeing ने 200 विमानों के ऑर्डर की पुष्टि तो की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन से मॉडल खरीदे जाएंगे, उनकी कीमत क्या होगी और डिलीवरी कब शुरू होगी। कृषि, LNG और अन्य व्यापारिक समझौतों को लेकर भी अभी तक कोई विस्तृत दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुआ है।
German Marshall Fund की विशेषज्ञ Bonnie Glaser ने कहा कि दुनिया के सामने फिलहाल वही जानकारी है जो ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से साझा की है। ऐसे में इन समझौतों की वास्तविक गहराई और आर्थिक असर का आकलन अभी जल्दबाजी होगा।
Middle East और Asia में बोइंग को लगातार बड़े ऑर्डर
पिछले कुछ महीनों में ट्रंप की विदेश यात्राओं के दौरान Boeing को कई बड़े सौदे मिले हैं। Qatar Airways ने 210 तक Boeing विमानों का ऑर्डर दिया था। South Korea की Korean Air ने 100 से अधिक विमान, इंजन और मेंटेनेंस सेवाओं के लिए लगभग 50 अरब डॉलर का समझौता किया।
वहीं Turkish Airlines और Emirates जैसी कंपनियों ने भी Boeing विमानों की बड़ी खरीद योजनाओं की घोषणा की है। ऐसे में ट्रंप अब इन सौदों को अपनी आर्थिक कूटनीति की सफलता के तौर पर पेश कर रहे हैं।
अमेरिका को आर्थिक राहत, चीन को कूटनीतिक बढ़त?
विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा में अमेरिका को संभावित आर्थिक फायदे जरूर मिले हैं, खासकर Boeing जैसे उद्योगों को। लेकिन कूटनीतिक और वैश्विक छवि के स्तर पर चीन ज्यादा मजबूत स्थिति में दिखाई दिया।
Xi Jinping ने इस यात्रा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि चीन अब अमेरिका के बराबर वैश्विक शक्ति है। वहीं ट्रंप का “G-2” बयान चीन की इस रणनीति को और मजबूती देता नजर आया। फिलहाल यही कहा जा सकता है कि ट्रंप अपने समर्थकों के सामने इसे बड़ी जीत की तरह पेश कर रहे हैं, लेकिन इन समझौतों का वास्तविक असर आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा।