Iran Israel War में ‘साइलेंट प्लेयर’ बना चीन? तेल, हथियार और ताइवान रणनीति का कनेक्शन
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच चीन की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का दावा है कि चीन राजनीतिक, आर्थिक और खुफिया स्तर पर ईरान का समर्थन कर सकता है। तेल आपूर्ति, मिडिल ईस्ट में प्रभाव और ताइवान रणनीति के कारण चीन के लिए ईरान बेहद अहम रणनीतिक साझेदार है।
China Role in Iran Israel war: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के बीच चीन की भूमिका को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि इस संघर्ष में चीन और रूस राजनीतिक और अन्य तरीकों से ईरान का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि दोनों देश किस तरह की मदद दे रहे हैं।
कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि चीन ईरान को रियल-टाइम खुफिया जानकारी दे सकता है, जो युद्ध में अहम भूमिका निभा रही है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका-इजरायल हमले के बाद बढ़ा तनाव
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई।
इसके बाद ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर जोरदार जवाबी हमले किए। हालात ऐसे हो गए हैं कि लगभग पूरा मिडिल ईस्ट युद्ध क्षेत्र में बदल गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी माना है कि यह युद्ध कई हफ्तों तक चल सकता है।
चीन के लिए क्यों अहम है ईरान
ईरान चीन का मिडिल ईस्ट में सबसे अहम रणनीतिक साझेदार माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन के लिए ईरान तीन वजहों से बेहद महत्वपूर्ण है।
- ऊर्जा और तेल आपूर्ति
- मिडिल ईस्ट में प्रभाव
- ताइवान को लेकर रणनीति
चीन अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 55% से ज्यादा हिस्सा मिडिल ईस्ट से हासिल करता है। इसमें लगभग 13% तेल अकेले ईरान से आता है। चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री मार्ग को नियंत्रित करता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। चीन के लिए यह मार्ग ऊर्जा सप्लाई का अहम रास्ता है। यही वजह है कि चीन ईरान के साथ अपने रिश्तों को बेहद अहम मानता है।
चीन ने आर्थिक रूप से भी किया समर्थन
अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2021 के बाद से चीन ने 140 अरब डॉलर से ज्यादा का ईरानी तेल खरीदा है।
इसके अलावा चीन ने ईरान में ऊर्जा, बैंकिंग, टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 400 अरब डॉलर के निवेश की योजना भी बनाई है।
चीन की कंपनियां Huawei और ZTE ईरान के टेलीकॉम नेटवर्क में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
ड्रोन और मिसाइल क्षमता में भी मदद के दावे
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल सिस्टम के विकास में चीन की तकनीकी सहायता का योगदान रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने ईरान को कई डुअल-यूज तकनीक और सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए हैं।
ताइवान रणनीति से भी जुड़ा मामला
चीन के लिए यह युद्ध ताइवान रणनीति से भी जुड़ा माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका मिडिल ईस्ट में ज्यादा संसाधन खर्च करता है, तो उसके पास ताइवान की सुरक्षा के लिए कम संसाधन बचेंगे। इससे चीन को रणनीतिक फायदा मिल सकता है।
इसी वजह से कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध में चीन एक बड़ा लेकिन ‘साइलेंट प्लेयर’ बनकर उभर रहा है।