विरोध प्रदर्शन से संसद तक... धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे BJP का बड़ा प्लान क्या है?
Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी टाइमिंग और वजहों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर छात्र आंदोलन लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए था, वहीं दूसरी ओर संसद के मानसून सत्र में कई अहम विधायी एजेंडे सरकार की प्राथमिकता बने हुए हैं। ऐसे में इस फैसले को केवल एक मंत्री के इस्तीफे से कहीं बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है। भाजपा ने लंबे समय तक इस्तीफा टालने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार पार्टी ने बड़े राजनीतिक लक्ष्य और संसद के आगामी एजेंडे को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। माना जा रहा है कि सरकार नहीं चाहती थी कि छात्र आंदोलन संसद के महत्वपूर्ण कामकाज पर भारी पड़े।
BJP क्यों नहीं चाहती थी तुरंत इस्तीफा?
रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि लगातार आंदोलनों के दबाव में किसी मंत्री का इस्तीफा लिया गया, तो भविष्य में भी ऐसे मामलों में इसी तरह की मांगें उठ सकती हैं। यही वजह रही कि सरकार ने शुरुआत में जांच, परीक्षा दोबारा कराने और प्रशासनिक बदलाव जैसे कई कदम उठाए, लेकिन इस्तीफे से बचती रही।
संसद का एजेंडा बना सबसे बड़ी प्राथमिकता
सूत्रों का कहना है कि मौजूदा मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों और राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इनमें परिसीमन (Delimitation) से जुड़े प्रस्तावों सहित कुछ महत्वपूर्ण विधायी योजनाएं शामिल मानी जा रही हैं। सरकार को आशंका थी कि यदि छात्र आंदोलन और तेज हुआ तो पूरा संसद सत्र प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से राजनीतिक नुकसान कम करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने का फैसला लिया गया।
आंदोलन लगातार बढ़ता गया
NEET-UG विवाद के बाद शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे देश के कई हिस्सों तक फैल गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन हुए और सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों के बावजूद विरोध खत्म नहीं हुआ। इससे सरकार पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता गया।
सरकार ने पहले कई विकल्प आजमाए
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले सरकार ने मामले की CBI जांच कराई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की, परीक्षा प्रणाली में सुधार की घोषणा की और पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून लाने की बात कही। इसके बावजूद आंदोलन जारी रहा और प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे।
'छोटी कुर्बानी, बड़ा लक्ष्य' की चर्चा क्यों?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बड़े राजनीतिक समीकरणों के साथ देखा। रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बड़े संसदीय लक्ष्य हासिल करने की रणनीति के हिस्से के रूप में देखा। हालांकि इस पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
आगे क्या रहेगा सरकार का फोकस?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार अब संसद के कामकाज, शिक्षा सुधारों और अन्य विधायी प्रस्तावों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार की कोशिश होगी कि छात्र आंदोलन का असर संसद की कार्यवाही और बाकी राजनीतिक एजेंडे पर न पड़े।